हिमालय और उसके ग्लेशियर भयावह दौर में है




भूटान से लेकर नेपाल और उत्तराखण्ड कहीं भी हिमार्लइ भूभाग अपनी सामान्य सिथति में नही है। केदारनाथ त्रासदी के बाद यह बात सीधे सामर्ने आइ थी कि उच्च हिमालय की पानी की झीलें, झरने और गलेशियर भारी मानवीय और वाहय दबाव में दरक रहे हैं जो भविष्य में किसी और बड़ी भयावह त्रासदी का संकेत है.गांधी शांति पुरस्कार विजेता डा भटट ने चेतावनी दी है कि सरकार तंत्र को तापमान
परिवर्तन के खतरो के अलावा उच्च हिमालय में तोड़फोड़ और विनिर्माण के  खतरों पर भी चेतना होगा। himalaya aur uske galesiyar bhayawah daur

उन्होंने कहा कि केदारनाथ की गांधी झील और आसपास के दरक रहे ग्लेश्यिर भविष्य के लिए बड़े संकेत है इन्हे समय पर समझा जाना चाहिए। रमन मग्सेसे , पदमश्री, पदम भूषण और गांधी शान्ति पुरस्कार से सम्मानित,चिपको आंदोलन के प्रणेता और भारत के विख्यात पर्यावरणविद्, गांधीवादी समाजसेवी चण्डी प्रसाद भट्ट यह बात कल यहां एक वर्षा प्रभावित् कार्यकर्म में देर शाम ऐतिहासिक व्याख्यान और स्लाइड शॉ के दौरान कही। himalaya aur uske galesiyar bhayawah daur

विश्व मित्र परिवार द्वारा प्राकृत, आरोग्य, संस्कृति, पर्यावरणीय विकास और पंच परमेश्वरी विषय पर दिल्ली के  मावलंकर सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी में पर्या वरणविद् चण्डीप प्रसाद  भट्ट ने हिमालय के स्वास्थ्य और उसके सिकुरते ग्लेशियरों की सेहत पर विस्तार से चर्चा की।इससे पहले विभिन्न खंडों में  विभाजित इस संगोष्ठी  में  पहले चरण में योग और अध्यात्म चर्चा के लिए आत्म ज्ञान प्रकाश  मंडल  संस्था के  संस्थापक और चेतनयोग आश्रम रोहिणी के  परमाचार्य तत्वदर्शी महात्मा परमचेतनानन्द ने अध्यात्म और योग के नाम पर राम रहीम और रामपाल जैसे संतों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ग्रहस्थ और सन्यास या योग का यह काकटेल बिलकुल  बर्दाश्त नही किया जाना चाहिए। सन्यासीके  लिए सन्यास के  अलावा ब्रंहमचर्य भी अनिवार्य है। himalaya aur uske galesiyar bhayawah daur



सैकड़ो बच्चों की जान लेने वाले डॉक्टर की दासता

योग और अध्यात्म के नाम पर दिनों दिन बढते दूराचारों और फर्जी संतो के बारे में  सन्यासियों और साधू समाज को गंभीरता से सोचना चाहिए क्योंकि इससे तो एक पूरा  समाज बदनाम हो जायेगा । चेतनयोग आश्रम रोहिणी के  संस्थापक 88 वर्षीय महात्मा परमचेतनान्द भौतिक रूप से अल्मोड़ा के भिकियासैण से ताल्लूक रखते हैं और  20 वर्ष की उम्र में दृष्टि लोप के बाद पूरी  तरह सन्यसत हो गए। ग्रहस्थ और सन्यास के  रामरहीमि घालम जेल  को बाबा समाज और भारतीय अध्यात्मधारा के  लिए खतरा बताते हैं। गोष्ठि में पूर्व  सांसद एवं मंत्री वशिष्ठ नारायण सिंह, ने प्राकृतिक आरोग्य और संस्कृति पर अपने विचार रखे। विजय खुराना, संकल्प के  संस्थापक श्री संतोष तनेजा, श्री मनोज कुमार  जिंदल  श्रीमती शिखा राय, श्रीमती सुनीता दुग्गल, श्री भूषण पाराशर ने प्रकृति पर्यावरण और संस्कृति पर विचार प्रकट  किये। himalaya aur uske galesiyar bhayawah daur

संस्था के मुख्य  नारे मेरी पृथ्वी  मै   ही सवारु  को पूरा  करने के लिए  श्री गुरुजी भू पर्यावरण संरक्षण एव ग्राम संसद यात्रा के  आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। साथ ही प्रकृति-पर्यावरण, संस्कृति और विष मुक्तकृषि के क्षेत्र में  2 करोड़ रोजगार की उपलब्ध कराने का दावा किया।संगोष्ठी के  अगले चरण में  सांस्कृतिक कार्य क्रम के  अन्र्तगत कथक नृत्यांगना विदुषी  श्रीमती शाम्भवी शुक्ला ने कथक नृत्य और प्ररसिद्ध गजल गायक पण्डित ब्रजेश मिश्रा ने अपने साथियों के  साथ गान पेश  किया।।अंतिम  चरण में विश्व मित्र परिवार की सहयोगी संस्था विश्व महिला परिवार ने दिल्ली के  तीनों नगर निगमों की नव निर्वाचित महिला पार्षदो का पंच परमेश्वरी कार्यक्रम के तहत अभिनन्दन  और स्वागत किया और महिला व समाज गौरव  सम्मान पर्दान किय गए। himalaya aur uske galesiyar bhayawah daur

पीलिया मारा का पौधा है पीलिया का दुश्मन