जानकी नवमी के दिन करें ये काम, बनेंगे आपके सारे बिगड़े काम




आज बैशाख शुक्ल पक्ष की जानकी नवमी है। माता जगत जननी जानकी मिथलेश जिसे माँ सीता और माँ मैथली के नाम से जानते है। आज उनकी जयंती बड़े धूमधाम के साथ उनकी जन्मस्थली पुनौरा जिला सीतामढ़ी बिहार में और जनकपुर नेपाल में मनाया जा रहा है। इसके साथ ही अयोध्या में भी जानकी नवमी के अवसर पर बड़े धूमधाम से इस त्यौहार को मनाया जाता है। devotional janaki navami history

सियाराम सियाराम का जाप करे

जबकि जगत जननी जानकी जिसे मैथिली के रूप में हम एक भाषा कहते है तो संस्कृति और संस्कार की एक सर्वश्रेष्ठ प्रमाण भी मानते है। इतना ही नहीं त्याग, तपस्या समर्पण और उन्नत समाज की स्थापना का एक प्रमुख आधार के रूप में देखते है। वास्तव में सीता एक नारी के रूप में आदि शक्ति है। जो कि प्रकृति के नियमों की शत प्रतिशत पालन करती दिखती है। devotional janaki navami history

प्रकाट्य से लेकर परमात्म शक्ति में विलीन होने तक जो उदाहरण जानकी जी ने प्रस्तुत किए, वैसे उदाहरण संसार में कही और देखने को नहीं मिलता है। मानव और प्रकृति की एक अनुपम मिशाल के रूप में हम माता जानकी को पाते है। जो अपने जीवन का क्षण-प्रतिक्षण प्रकृति के नियमों को पालन करने वाली जनकपुर से लेकर के अयोध्या, वनवास फिर लंका में अशोका वाटिका में रहना और वंहा से लौटकर अवध आने के बाद पुनः वनवास में जाना इनकी प्रकृति के साथ अद्भुत संबंध को दर्शाती है। devotional janaki navami history

मनोवांछित फल प्राप्त होगा

वास्तव में सीता ही राम को व्यापक बनाती है। सहजता और सरलता की जो पाठ जानकी जी ने वास्तविक शिक्षा दी। वही एक बात मानव मात्र के लिए पठनीय और अनुकरणीय है। सुख और दुःख की परवाह किये बगैर जानकी जी को अपने जान ( प्राण ) में प्रेम पूर्वक उतारने के लिए सीता जी को ही प्रेरणाश्रोत बनाना है। devotional janaki navami history  

जानकी जी जीवन की प्रकृति से आरम्भ होकर प्रकृति में समाहित होने तक की कथा हम सुनते चले आ रहे है। जिसमें प्रकृति प्रमुख रूप से संरक्षित दिखाई दे रही है। दुःख की पराकाष्ठा है सीता जो अपनी सहन शकित से संसार को ही नहीं नियंता को भी अपने नियंत्रण में रखती थी और है। devotional janaki navami history  

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राम भक्त हनुमान को अमर करने वाली सीता माता इस संसार को नियमित सुख शांति से जीने के लिए एक सुन्दर सी राह दिखाने वाली माँ सिया जी, जिसके मात्र एक आह्वान पर धरती माता स्वंय प्रकट होने वाली जगदम्बा माँ की जय जय कार करते हुए उन्हें अपने गोद में बिठाकर हमेशा-हमेशा के लिए इस धरती माता को धन्य कर गई। ऐसी माँ सीता के जानकी नवमी पर नतमस्तक होकर कोटि कोटि प्रणाम करता हूँ ताकि इस संसार में सुख शांति और समृद्धि हो। इस दिन व्रती को किसी भी समय स्नान आदि से निवृत होकर विधिवत पंचौपचार पूजा करके 108 बार सियाराम सियाराम का जाप करे। इससे मनोवांछित फल प्राप्त होगा। devotional janaki navami history  
( हरिशंकर तिवारी )