14 जनवरी 2018 को है मकरसंक्रांति,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास




मकरसंक्रांति का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व के साथ साथ समाजिक उत्सव के रूप में बड़ा ही महत्व पूर्ण स्थान है। ज्योतिष शास्त्र में इस पर विस्तार से विचार किया गया है। सृष्टि के आरम्भ में परम पुरुष नारायण ने अपनी योगमाया से अपनी प्रकृति में प्रवेश कर सर्वप्रथम जल में अपना आधान किया। इस कारण से इन्हें हिरण्यगर्भ भी कहा जाता है। सर्वप्रथम होने कारण ये आदित्य देव भी कहलाते हैं। इस वर्ष रविवार 14 जनवरी 2018 को मनाई जाएगी। devotional makar sankranit vrat katha

सूर्य से ही सोम यानी चन्द्रमा ,पृथ्वी, बुद्ध एवं मंगल की उतप्ति हुई । जबकि आकाश से बृहस्पति जल से शुक्र एवं वायु से शनि को उत्त्पन्न करके ब्रह्मा जी ने मनः कल्पित वृत्त को बारह राशियों तथा बाइस नक्षत्रों में विभक्त किया। उसके बाद श्रेष्ठ ,मध्यम एवं निम्न स्रोतों से सत , रज एवं तम यानी की तीन तरह की प्रकृति का निर्माण किया। अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें www.hindumythology.org

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