जानिए गंगा दशहरा की कथा एवम महत्व




गंगा दशहरा हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। तदनुसार, इस वर्ष गंगा दशहरा मंगलवार 14 जून 2016 को मनाया जायेगा। स्कन्द पुराण में वर्णित है कि ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन पवित्र नदियों में स्नान एवम दान करने से महापातकों के बराबर पापो से मुक्ति मिलती है। इस दिन मथुरा में गंगा नदी के घाटो पर पतंगबाजी का विशेष आयोजन होता है। know ganga dussehra story  

गंगा दशहरा की कथा know ganga dussehra story  

प्राचीन काल में अयोध्या में सगर नामक एक प्रतापी राजा रहता था। जिसने सात समुद्र को जीत लिया था। उनकी दो रानियाँ थी एक रानी से एक पुत्र तथा दूसरे रानी से 60 हजार पुत्र की प्राप्ति हुई थी। एक बार राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया तथा यज्ञ को सफल करने के लिए उन्होंने एक अश्व को छोड़ा।

किन्तु स्वर्ग के स्वामी ने इस यज्ञ को भंग करने के लिए उस अश्व का हरण कर लिया और अश्व को कपिल मुनि के आश्रम में बाँध आए। अश्व की खोज के लिए राजा सगर ने अपने 60 हजार पुत्रो को भेजा। जब राजा के पुत्रो ने पिता द्वारा छोड़े गए अश्व को कपिल मुनि के आश्रम में देखा तो सभी लोग चोर-चोर चिल्लाने लगे।

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इस कोताहुल से कपिल मुनि की तपस्या भंग हो गयी। कपिल मुनि ने ज्योही अपने आँखे खोली तो सारा कुछ जलकर भष्म हो गया। तत्पचात राजा सगर के पौत्र ने गरुड़ देव से इस सन्दर्भ में जानकारी हासिल की। गरुड़ जी ने कहा कि यदि अपने पूर्वजो की मुक्ति चाहते हो तो गंगा नदी को मृत्यु लोक में लाओ।

तत्पश्चात राजा दिलीप के पुत्र भागीरथ ने कठिन तपस्या कर गंगा नदी को धरातल पर लाया। जब गंगा नदी धरातल पर आई तो समस्त पृथ्वी लोक में हाहाकार मच गया। सब कुछ डूब गया। तत्पश्चात भगवान शिव जी गंगा माँ को अपने जटाओं में समेट लिया। इस तरह भागीरथ के पूर्वजो को मृत्यु लोक से मुक्ति मिल गई।know ganga dussehra story  

गंगा दशहरा का महत्व know ganga dussehra story  

हिन्दू धर्म में गंगा जी का विशेष महत्व है। गंगा दशहरा के दिन लाखो लोग गंगा नदी की पवित्र जलधारा में आस्था की डुबकी लगाते है। भविष्य पुराण में माँ गंगा के प्रादुर्भाव एवम महत्व का उल्लेख मिलता है।

इस पुराण के अनुसार जो मनुष्य गंगा दशहरा के दिन नदी में खड़ा होकर ॐ नमो भगवती हिलि-हिलि, मिलि-मिलि गंगे माँ पावय स्वाहा का मंत्रोच्चारण दस बार करके माँ गंगा को अर्घ्य देता है। ना केवल उसके पापो का नाश होता है अपितु उसके समस्त पितरो को मुक्ति मिलती है। गंगा दशहरा दस प्रकार के पापो का नाश करती है। अतः इसे गंगा दशहरा कहा जाता है। अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें www.hindumytholgoy.org know ganga dussehra story