जानिए महाराणा प्रताप की जीवनी know life story of maharana pratap

जानिए महाराणा प्रताप सिंह जी की जीवनी





प्रवीण कुमार,
महाराणा प्रताप का जन्म ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी 9 मई 1540 ई में राणा उदय सिंह के निवास कुम्भल गढ़ दुर्ग में माता महारानी जयवन्ता कुँवर के गर्भ से हुआ था। महारणा प्रताप सिंह ने 11 शादियाँ की थी। उनके कुल 19 संतान थी।
महाराणा प्रताप बचपन से ही साहसी, वीर, स्वाभिमानी तथा स्वतंत्रता के पुजारी थे। सन 1572 ई में उन्होंने मेवाड़ की गद्दी संभाली। परन्तु इस समय ही उन्हें हल्दी घाटी युद्ध का समाना करना पड़ा। अभूतपूर्व संकटो का सामना करने के पश्चात भी महाराणा प्रताप ने धैर्य तथा साहस का साथ नही छोड़ा। हल्दी घाटी के युद्ध में उन्होंने अपने पराक्रम को दिखाया वह भारतीय इतिहास में असामान्य है।
महाराणा प्रताप को स्वतंत्रता प्रिय था अतः उन्होंने अकबर की अधीनता को नही स्वीकारा। अपनी मर्यादा की रक्षा के लिए महाराणा प्रताप ने प्रतिज्ञा लिया कि जब तक अपना राज्य मुक्त नही करवा लूंगा, तब तक राज्य सुख का भोग नही करूंगा। महाराणा प्रताप अरावली के जंगलो में भटकते रहे।
हालांकि महाराणा प्रताप मुगलो की विशाल सेना को पराजित नहीं कर पाए ,परन्तु समस्त विश्व के समक्ष उन्होंने जो वीरता का आदर्श प्रस्तुत किया वह असाधारण एवम सम्मानीय है। इतिहास इस बात की साक्षी है कि यदि राजपूतो को भारीतय इतिहास में सम्मानपूर्ण स्थान मिला तो इसका श्रेय महाराणा प्रताप को जाता है। उन्होंने अपने जीवन के अंत काल तक अपनी मातृभूमि को कलंकित और परतंत्र नही होने दिया। उन्होंने अपने शासन में मुगलो की सेना तथा मुगल सम्राट अकबर को लोहे के चने चबाने पर विवश कर दिया। महाराणा प्रताप आजीवन संघर्ष किया। जानिए महाराणा प्रताप की जीवनी know life story of maharana pratap

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