जानिए विनायक चतुर्थी की कथा एवम इतिहास




सोमवार 10 मई 2016 को संकष्टी चतुर्दशी मनाया जाएगा। धार्मिक धारणा है की हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा से प्रत्येक शुभ कार्य आरम्भ किया जाता है। भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। सनातन धर्म में 24 दिन ऐसे होते है जो पूर्णतः भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है। अतः वर्ष की हर माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है जिसमे भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। know vinayak chaturdashi story 

संकष्टी चतुर्दशी की कथा know vinayak chaturdashi story 

शिव रहस्य पुराण के अनुसार भगवन गणेश जी शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव जी एवं माता पार्वती के पुत्र रूप में प्रकट हुए थे। शिव पुराण में कहा गया है कि देवी गिरिजा ने भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए 12 वर्षो तक कठिन तपस्या, व्रत एवं साधना किया जिसके फलस्वरूप शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के दिन मध्यान में स्वर्ण कांति से युक्त भगवान गणेश जी प्रकट हुए थे। अतः ब्रह्मा जी ने चतुर्दशी व्रत को अतिश्रेष्ठ व्रत बताया है। vinayak-chaturdashi-2016




संकष्ट चतुर्दशी पूजन विधि know vinayak chaturdashi story 

वर्ष के प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को संकष्ट चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन संध्याकाल में स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेश जी की पुष्प, अक्षत, शुद्ध जल, पंचामृत, धुव से पूजा आराधना करना चाहिए। आरती तथा पुष्पांजलि अर्पित कर प्रदक्षिणा करना चाहिए। पूजा समाप्ति के समय भगवान विघ्नहर्ता से सुख और मंगल की कामना करे। भगवान गणेश भक्तो की सारी मनोकामना पूर्ण करते है।know vinayak chaturdashi story 

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विनायक यानि की गणेश जी माँ पार्वती एवम भगवान शिव जी के पुत्र है और इनके ज्येष्ठ भाई कार्तिकेय है। यू तो महीने के दोनों पक्षों में विनायक चतुर्दशी मनाई जाती है। किन्तु भाद्र माह में गणेश चतुर्दशी का विशेष महत्व है और इस दिन महाराष्ट्र सहित पुरे भारत में बड़े ही धूमधाम और हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। know vinayak chaturdashi story 

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