आज है योगिनी एकादशी जानिए कथा एवम इतिहास




हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी व्रत मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष गुरूवार 1 जुलाई 2016 को योगिनी एकादशी व्रत मनाई जाएगी। एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है। योगनी एकादशी के दिन पीपल वृक्ष की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। know yogini ekadashi story 

योगिनी एकादशी व्रत कथा know yogini ekadashi story 

पौराणिक कथा अनुसार प्राचीन काल में अलकापुरी नामक नगरी में कुबेर नाम का राजा राज करता था। राजा भगवान शिव जी का अनन्य भक्त था तथा राजा भगवान शिव जी की प्रतिदिन पूजा करने नगर में स्थित भगवान शिव जी के मंदिर जाया करता था। राजा के पूजा हेतु पुष्प प्रतिदिन हेम नामक माली लाया करता था। know yogini ekadashi story 

एक दिन हेम माली नियमित समय पर राजा के प्रागण में पुष्प लेकर नही आया । तत्पश्चात राजा ने सेवको को आदेश दिया कि जाके पता लगाए की हेम माली आज क्यों नही आया। सेवक गण जब हेम माली के प्रवास पर पहुंचे तो दृश्य देखकर शीघ्रः ही राजा कुबेर के पास लौट आया। तदोपरांत सेवको ने राजा को बताया कि हेम माली अपनी स्त्री के साथ रमन कर रहा है। सेवको की वचनो को सुनकर राजा ने हेम माली को बुलाने का आदेश दिया। know yogini ekadashi story 

राजा कुबेर की आज्ञानुसार हेम माली को राजा के सम्मुख प्रस्तुत किया गया। क्रोध में उस समय राजा कुबेर ने हेम माली को श्राप दे दिया। मुर्ख, स्त्री के रमन में तू नित्य कर्म करना भूल गया अब तुम स्त्री का वियोग भी भोगेगा एवम मृत्यु लोक में जाकर कोढ़ी हो जायेगा। राजा कुबेर के श्राप से हेम माली तत्क्षण कोढ़ी हो गया। know yogini ekadashi story 

स्त्री के वियोग एवम कोढ़ के प्रभाव से हेम माली ने महादुःख कष्ट सहे। किन्तु परिस्थिति प्रतिकूल होने के बाद भी हेम माली की बुद्धि मलिन नही हुई। हेम माली हिमालय पर्वत की ओर चल दिया। हिमालय मार्ग में हेम माली की भेंट एक ऋषि से हुई। हेम माली ने उन्हें विनय पूर्वक प्रणाम कर उनसे श्राप प्रभाव से मुक्त होने का मार्ग प्रशस्त करने को कहा। know yogini ekadashi story   

हेम माली की व्यथा सुनकर ऋषि ने कहा की तुम आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करों। इस व्रत को करने से तुम्हे इस श्राप से मुक्ति मिलेगी। ऋषि के वचनो अनुसार हेम माली ने योगिनी एकादशी का व्रत किया। व्रत फल के प्रभाव से हेम माली पुनः अपने पुराने स्वरूप में आ गया और अपनी स्त्री के साथ सुख पूर्वक रहने लगा। know yogini ekadashi story   

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