गुजरात पाठयक्रम में रोज़ा को बीमारियों का घर





राज्य सरकार के स्कूलों के पाठ्यक्रम में धर्म को लेकर एक बार फिर विवादपूर्ण अर्थ लिखे गए हैं जिससे अब बोर्ड पर सवाल उठ रहे हैं। अहमदाबाद के संगठन का कहना है कि धर्म को लेकर ऐसी गलती बर्दाश्तेकाबिल नहीं है। gujrat syllabus: disease home

गुजरात राज्य विद्यालय पाठ्यपुस्तक बोर्ड के चौथी कक्षा के किताब में ऐसी गलती की गई है जो काफी आपत्तिजनक है। इसमें लिखा रोजा को एक संक्रामक रोग बताया गया है। इसमें लिखा है कि इस रोग में दस्त और उल्टी आती है। यह कोई पहली बार नहीं है कि गुजरात राज्य विद्यालय की पाठ्यपुस्तक में ऐसा किया गया है। इसके पहले भी पाठ्यपुस्तक में धर्म को लेकर ऐसी बात की गई थी जिसको लेकर खूब हो हल्ला हुआ था। जिसमें गुजरात राज्य विद्यालय पाठ्यपुस्तक के नौंवीं कक्षा की किताब में जीसस क्राइस्ट के बारे में अपमानजनक बातें लिखी गई थी। 




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इस बार जो गलती की गई है वह महान उपन्यासकार व कहानीकार प्रेमचंद की कहानी ईदगाह में। किताब के तीसरे पाठ के अंत में रोजा शब्द का मतलब समझाते हुए लिखा गया है कि यह एक संक्रामक रोग है जिसमें दस्त और काई आती है। यह गंभीर मामला है। ऐसे में जब देश में सहिष्णुता और असहिष्णुता की बात सामने आती है। जीएसएसटीबी ने सफाई में कहा है कि यह मामूली प्रिंटिग में हुई गलती है। दरअसल जहां रोजा लिखा हुआ है वहां हैजा लिखा होना चाहिए। रोजा और हैजा मिलता जुलता शब्द है जो गलती से दोनों शब्द आपस में बदल गए हैं। जीएसएसटीबी का कहना है कि 2015 से ही यह किताब पढ़ाई जा रही है उसमें कहीं भी ऐसी गलती सामने नहीं आई है। नई एडिशन में ऐसी गलती हो गई है जो 2017 की है इसकी प्रतिकम छपी है यानी 15000 ही अभी तक प्रकाशन हुए हैं इसे सुधार लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर अहमदाबाद के एक संगठन ने कहा है कि धर्म को लेकर ऐसी गलती बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वे इसकी शिकायत ऊपर तक ले जाएंगें। gujrat syllabus: disease home

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