Ola के ड्राइवर गए सलाखों के पीछे





दिल्ली पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद बड़ी सुझबुझ से अपहरण किए गए डॉक्टर को रिहा करा लिया। डॉक्टर का अपहरण दिल्ली के प्रीत विहार इलाके से किया गया था। ओला कंपनी को आगे रखकर पूरी साजिश चली गई थी जिसके कारण कंपनी 5 करोड़ रुपए फिरौती तक देने को तैयार हो गई थी। प्रीत विहार इलाके से 14 दिन पहले ओला बुक कराकर घर जा रहे डॉक्टर का अपहरण कर लिया गया। इनके रिहाई के लिए ओला कंपनी से पांच करोड़ रुपए मांगे गए। ola driver kidnapped doctor

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दिल्ली पुलिस ने बड़ी समझदारी से ओला कंपनी से तालमेल बनाकर अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया और उनके साथियों को तलाश अभी जारी है। डॉक्टर के अगवा करने की पूरी साजिश प्रमोद नामक व्यक्ति ने की थी। जब 6 जुलाई को डॉक्टर ने मेट्रो हॉस्पिटल से दक्षिण दिल्ली अपने घर जाने के लिए ओला कैब बुक कराई थी। कैब को सुशील नामक ड्राइवर चला रहा था। ola driver kidnapped doctor

सुशील ने डॉक्टर को घर छोड़ने के बजाय उत्तर प्रदेश के अपने ठिकाने पर लेकर चला गया। और वहीं डॉक्टर को बंधक बना लिया। डॉक्टर को छुड़ाने के लिए ओला कंपनी से पांच करोड़ रुपए की फिरौती मांगी। ओला कार में जीपीएस लगा होने के कारण पुलिस ने छानबीन कर पता तो कर लिया लेकिन इसका पता अपहरणकर्ता को भी यह हवा लग गया और तब उसने वैगन आर से भाग निकले। पुलिस जब पीछा कर रही थी तो उस समय अपहरणकर्ता ने पुलिस गाड़ी पर फायरिंग तक की। पुलिस ने इस पूरे ऑपरेशन में ओला कंपनी की सहायता ली जिसने टेक्निकल रूप से काफी मदद की।

हालांकि ओला कंपनी पर भी ऊंगली उठी है कि उसने बिना सही कागजात के कैब को अपने यहां लगाया हुआ था। पुलिस ने बड़ी समझदारी से अपहरणकर्ताओं के परिवार को हिरासत में ले रखा था ताकि डॉक्टर को सुरक्षित छुड़ाया जा सके। गिरफ्तार किए गए अपहरणकर्ता से पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि इस पूरी वारदात को सुशील, अनुज, गौरव पंडित और विवेक उर्फ मोदी ने मिलकर अंजाम दिया था। सभी दौराला के रहने वाले बताए गए हैं।

ओला कंपनी से खुन्नस निकालने के लिए आरोपियों ने यह साजिश की थी। गौरतलब है कि तीन आरोपियों की तीन गाड़ियां पहले ऑरिजनल रजिस्ट्रेशन से ओला कंपनी में चलती थी, लेकिन सवारियों के साथ दुर्व्यवहार और अन्य शिकायतों के चलते कंपनी ने उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इस कारण से आरोपियों ने फर्जी रजिस्ट्रेशन के कागजात और पहचान पत्र से एक बार फिर ओला में रजिस्टर्ड करावई मकसद साफ था बदला लेना। जिसका पर्दाफाश पुलिस ने किया।



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