दो-दो दीप जलायें आज खुशियां बरसे सारी रात

दो-दो दीप जलायें आज
खुशियां बरसे सारी रात deepawali poetry

एक दीप हो अपने लिये
दूजे हो पडोसी के हाथ
एक दीप दीन-दुखियो खातिर
दूजे हो अमिरों के साथ ।
दो-दो दीप जलायें आज……

एक दीप से दूर अंधेरा
दूजे करे भाईचारे की बात
एक दीप से रौशन घर–आंगन
दूजे से रौशन जग-संसार।
दो-दो दीप जलायें आज……

एक दीप से जले बुराई
दूजे से फैले अच्छाई
आस-पास हो साफ सफाई
दिग-दिगंत फैले यह बात
दो-दो दीप जलायें आज…….

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एक तो दूर पटाखों से
दूजे दूर चीनी लाइटों से
दीप जलायें मिट्टी का
दे “लाल” को ये सौगात
दो-दो दीप जलायें आज……

सचिव-लाल कला मंच,नई दिल्ली

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