गोरखधंधा देख के दंग रह गया





दिल्ली मुक्तधारा सभागार में अछिञ्जल नामक एक संस्था डाक वचन और गौरख धंधा नामक नाटक का मंचन करके लोगों का मन मोह लिया। डाक बचन वास्तव में गीता के उपदेश के समान ही महत्व रखने वाले विहार हैं। gorakh dhandha drama played 

जिन्हें मिथिला के महान दार्शनिक ,ज्योतिष एवम कवि ढाक ने कहे हैं। मिथिला में डाक बचन एक तकिया कलाम, मुहाबरा या इसे एक मौखिक परम्परा के रूप में इसका प्रयोग परम्परागत रूप में होता आया है। श्रुति परम्परा सैकड़ों बर्षों तक प्रचलन में रहा। gorakh dhandha drama played 

बाद में कुछ विद्दानों ने जब ये महशुस किया कि इन बचनों के प्रकाशन आवश्यक है तब उनहोंने इसे प्रकाशित करवाये। कुछ विद्द्वान इसे गोप कन्या और पण्डित वाराहमिहिर के पुत्र के रूप में डाक को प्रतिष्ठित किया है। दैनिक जीवन में होने वाली समस्याओं के समाधान हेतु जो बचन डाक ने कहे हैं वो काबिले तारीफ़ है। गृहस्थ ,कृषि ,वर्षा वर्षफल ,गृहस्थाश्रम ,यात्रा संस्कार ,स्वास्थ डाक की दृस्टि फकड़ा के रूप में डाक बच्चन में मिलती है। gorakh dhandha drama played 

मिलिए देश के दो दिग्गज देशभक्त से जिसने लोगों को दीवाना बना दिया

आमजन अपनी दिनचर्या में जैसे भगवत गीता का प्रयोग करते हैं। ठीक वेसे ही डाक बचन का प्रयोग मिथिला के आम जनों में प्रचलित रहा है। जैसे लोग रामायण ,गीता ,भागवत आदि का उदाहरण देते हैं ,ठीक उसी प्रकार लोग बाग़ मिथिला में डाक बचन का उदाहरण देते हैं। एक प्रकार से देखें तो चाणक्य नीति का प्रभाव भी इसमें देखने को मिलता है। इसबार डाकबचन कीर्तन शैली में सुनने को मिला जो कि एक अनूठा प्रयोग लगा।

आयोजकों के अनुसार ये उनकी चौथी प्रस्तुति थी। मुख्य गायक अजित झा जबकि कोरस में परुषोत्तम मिश्रा तरुण झा ,बबिता प्रतिहस्त ,परवीन झा आदि थे। संगीत सुनील पवन का और परिकल्पना काश्यप कमल का था। गोरखधंधा -मैथिली नाटक आज के समाज में धूर्त लोगों के द्वारा जो किया जाता है उसका जीता जागता प्रमाण हमारे सामने पस्तुत करता है। gorakh dhandha drama played 

इस अभिनय में सभी कलाकारों ने अपनी तरफ से कोई कस्र उठाकर नही रखा। स्त्री और पुरुष दोनों के सधे हुए अभिनय से जहां दर्शकों का भरपूर मनोरंजन हुआ वही कलाकारों ने भी खूब तालियां बटोरी। इस नाटक में एक कलाकार ने दो दो अभिनय प्रस्तुत किये लेकिन कही भी दर्शकों को बोर नही होना पड़ा। gorakh dhandha drama played 

कलाकारों ने खूब तालियां बटोरा gorakh dhandha drama played 

सूत्रधार के रूप अजित झा ,प्रवीण झा ,नटुआ भूत के छोटे से रोल मेमोज हर्ष किशना परसेंट मण्डल मंत्री रामभरोष विपटा, खेळूबाबा,राजा —काश्यप कमल , अभिषेक देवनारायण ,गणौली बाई इमरती सुप्रीता झा जिलेबी उगन के कनियाँ बबिता प्रतिहस्त ,स्त्री एक स्वेता दू बबिता श्रीवास्तव दू टा युवक तरुण झा आ पुरुषोत्तम मिश्र मुसलमान दरवारी आ विकल तेजनारारायण चौधरी ,मुर्गा के रो में उज्ज्वल राजकुमारक रूप में मौर्यन खूब जमे। gorakh dhandha drama played 

संगीत संयोजन मिथिला के प्रसिद्ध गायक संगीतकार सुनील पवन ने किया गया अजय मिस्र गौरव राजपूत ,गायन अजित झा बबिता झा यदुवीर भारती रूपसज्जा ऋचा तिवारी आदि लोगों ने भी शिरकत किया ।

प्रबन्धन आनन्द झा,विजय झा,मुकेश झा,स्यामा चरण झा प्रचार प्रसार बजरंग मण्डल यदुवीर भारती। इस नाटक में चार लोग सबसे महत्वपूर्ण थे सुनील पवन ,काश्यप कमल ,अभिषेक देवनारायण और नीलम कला केंद्र यूथ परिषद के और से हुआ । इनके अथक प्रयास का प्रतिफल ही है ये अछिञ्जल की सफल प्रस्तुती। gorakh dhandha drama played 
( हरि शंकर तिवारी )




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