हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही नहीं अब भाषा




हिन्दी हिन्दुस्तान की ही, रही नहीं अब भाषा hindi hindustan ka nahi hai 
फैल रही है दुनिया में, बन जन-जन की आशा
हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही……..
आजादी में फर्ज निभाया, बनके जैसे फौजी
दसों दिशा के लोग बने, थे अजब मनमौजी
बनी देश की भाषा यह दुनिया की अभिलाषा
हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही……..
दुनिया में हिन्दी विना अब,सब कुछ है अधूरा hindi hindustan ka nahi hai 
बिदेशी कंपनिया अब, ध्यान दे रही है पूरा
हिन्दी बेहतर हो रही पहले से यह भाषा
हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही……..
आर्यों–अनार्यों से चली, प्राकृत औऱ पाली hindi hindustan ka nahi hai 
तत्सम,तदभव,देशज से बनी यह शक्तिशाली
युगों–युगों में लिपि निखरी निखरी यह भाषा
हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही……..
रौशन हो रही है हिन्दी, एशिया और जहान में
इसे ‘लाल’ संग और बढाओं पूरे इस जहान में
बुजुर्गों की शान रही है य़ुवाओं की अब आशा
हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही. hindi hindustan ka nahi hai 

लाल कला मंच ने विश्व पर्यावरण दिवस पर कवि गोष्ठी कर लोगों को किया जागरूक

आबादी के दंश से पर्यावरण खराब ।

आबादी को रोक के, धरा करेंगे साफ।1।

पेड़ों में ब्रम्हा ,विष्णु ,पेड़ो में श्रीराम।

वन बचाने खातिर अब,लाल करो कुछ काम।2।

जीव रहे तब तक जिंदा,जब तक इनमें जान।

लाल खातिर है पादप,जस मानों भगवान।3।

वन धरा से मत काटें ,इसे लगाना सीख ।

वरना सेहत ना रहे ,मांगे मिले न भीख।4।

नेता भाषण रोज दे, पार्क में सरेआम।।

उसके जाते हो गया ,सारा काम तमाम।5।

तुलसी में विष्णु निवास,पीपल में श्रीकृष्ण।

बरगद में ब्रम्हा मिले, मिले आम से सीख।6।

गंगा तड़से मोक्ष को, बदला गजब रिवाज।

मानव अब तो सुधर जा,वरना गिरेगी गाज।7।

दो कदम हम चलें औऱ दो कदम चले आप।

तब जाके प्रदूषण का,मिटे धरा से छाप। 8।

एक हजल-धरा पर पेड़ न रहे….

दूसरी कविता

धरा परपेड़ न रहे तो सोचों क्या होगा

न येंजमीं न ओ आसमां होगा…..

न येचाँद न तारे न ये मौसम होगा

हर तरफशोर ही शोर और धुआं होगा

पेड़-पौधेपोषक हैं जीव – जन्तु के

धरा काहै गहना,इसको बचाना होगा

रहे नपेड़ तो जीवों का जीना मुश्किल

जीवो केखातिर वन लाल रोपना होगा

धरा परपेड़ न रहे तो सोचों क्या होगा

न येंजमीं न ओ आसमां होगा.

( लाल बिहारी लाल )

हर दर्द की दवा है लोंग



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