सेवा में रचना” क‍िसान” प्रस्तुति-लाल बिहारी लाल




खेत छोड़ रूठा आज किसान है kisan rachna peom lal bihari lal
बोझ गरीबी का निकली जान है kisan rachna peom lal bihari lal
कब तक मेहनत करें ये बताओ kisan rachna peom lal bihari lal
आख़िर ये भी तो एक इंसान है kisan rachna peom lal bihari lal

तन पर बचीं अभी तक लाज है
सड़कों पर बिखर गया अनाज है
व्यापार के नाम पर देखो ज़रा
बाजारों में छिपे हुए काले बाज़ है

” क‍िसान”

सारे हैं मौन
मर रहा किसान
दोषी हैं कौन

मजे की बात
हो रही सियासत
देखो हालात

चिंता वोट की
खिसक रही कुर्सी
ऐसी चोट की

ना है आयोग
जो सुने किसान की
बढ़ा है रोग

राज बदले
हालात ना सुधरे
ताज बदले

क्या करे कोई
सुलक्षणा सोच में
जनता सोई

मातृ दिवस पर लाल बिहारी लाल के दोहे

माँ जीवन का सार है, माँ है तो संसार।
माँ बिन जीवन लाल का,समझो है बेकार।1।

माँ की ममता धरा पर, सबसे है अनमोल।
माँ जिसने भूला दिया,सब कुछ उसका गोल।2।

माँ सम गुरू नहीं मिले, ढ़ूढ़े इस संसार।
गुरु का जो मान रखा,नैया उसका पार।3।

माँ के दूध का कर्जा, चुका न पाया कोय।
जन जो कर्ज चुका दिया,जग बैरी ना होय।4।

माँ पीपल की छांव है,माँ बगिया के मूल।
माँ जीवन का सार है, हरे लाल के शूल।5।

माँ से जग संसार है,माँ से जीवन मूल।
माँ बिना मोल कुछ नहीं,मुर्झाये सब फूल।6।

मजदूर दिवस पर लाल बिहारी लाल के दोहे
दुनिया के हर कामको,देते सदा अंजाम।

चाहे कोई कुछ कहे,लेते नहीं विराम ।1।

इनके ही सम्मानकी बाते करते लोग।

इनके नहीं नसीबमें,जीवन को ले भोग।2।

कहीं तोड़े पत्थरतो, कही तोड़ते हार।
लाल तरस नहीखाये,अजब गजब ब्यवहार।3)
पल-पल करते चाकरी,रोटी खातिर रोज।

लाल जाने कब अइहें,जीवन में सुख भोग।4।

मजदूरों के जोग से दुनियाबने महान।

चाहे बात विनाश कीया हो फिर निर्माण।5।

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर लाल बिहारी लाल की कविता

खान-पान की कमी से, रोज बिमारी होय।
खाना खाओं समय पर,रोग कभी ना होय।1।
रात को सोना जल्दी,सुबह करो नादेर।
वरना कोई रोग अब , लेगा तुमकोघेर ।2।
हाथ खाने से पहले ,मुँह खाने केबाद।
निश-दिन धोना सीख लो,जीवन रहेअबाद।3।
मेहनत करना सीखों , रोग रहे तबदूर।
जीवन हो आनंदमय,काया सुखभरपूर।4।
रोना-धोना छोड़ के ,सीखों करनामाफ।
रोग “लाल”उसी दिन से ,हो जायेगाहाफ।5।
ब्यस्त रहो मस्त रहो,फटके ना तबरोग।
“लाल”संग-संग मिल के,जीवन को लोभोग।6।
परम साध संतोष है, सब साधोंमें खास।
लाल अमल कर देख लो, जीवन आयेरास।7।
हरा साग सब्जी खाओं.,रहो सुखी दिनरात।
निश दिन रोग दूर रहे,”लाल”मिले सौगात।8।

( लाल बिहारी लाल )