जानिए नेहरू जी की जीवनी




बच्चें हर देश के भविष्य और उसकी तस्वीर होते हैं। बच्चे ही किसी देश के आने वाले भविष्य को तैयार करते हैं। लेकिन भारत जैसे देश में बाल मजदूरी,बाल विवाह और बाल शोषण के तमाम ऐसे अनैतिक और क्रूर कृत्य मिलेंगे जिन्हें देख आपको यकीन नहीं होगा कि यह वही देश है जहां भगवान विष्णु को बाल रूप में पूजा जाता है और जहां के प्रथम प्रधानमंत्री को बच्चे इतने प्यारे थे कि उन्होंने अपना जन्म दिवस ही उनके नाम कर दिया। know nehru life story 

देश के प्रथमप्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को बच्चों से विशेष प्रेम था। यह प्रेम ही था जो उन्होंने अपने जन्म दिवस को बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।जवाहर लाल नेहरू को बच्चों से लगाव था तो वहीं बच्चे भी उन्हें चाचा नेहरू के नाम से जानते थे। जवाहरलाल नेहरू ने नेताओं की छवि से अलग हटकर एक ऐसी तस्वीर पैदा की जिस पर चलना आज के नेताओं के बस की बात नहीं। आज चाचा नेहरू का जन्म दिन है। know nehru life story 

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14नवंबर, 1889 कोउत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जन्मे पं. नेहरू का बचपन काफी शानो शौकत से बीता। उनके पिता देश के उच्च वकीलों में से एक थे।पं. मोतीलाल नेहरु देश के एक जाने माने धनाढ्य वकील थे। उनकी मां का नाम स्वरूपरानी नेहरू था। वह मोतीलाल नेहरूके इकलौते पुत्र थे। इनके अलावा मोती लाल नेहरू की तीन पुत्रियां थीं उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। know nehru life story 

27 मई, 1964 को उनका निधन हो गया

पं. नेहरु महात्मा गांधी के कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़े। चाहे असहयोग आंदोलन की बात हो या फिर नमक सत्याग्रह या फिर1942के भारत छोड़ो आंदोलन की बात हो उन्होंने गांधी जीके हर आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। नेहरू की विश्व के बारे में जानकारी से गांधी जी काफी प्रभावित थे और इसीलिए आजादी के बादवह उन्हें प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहते थे। know nehru life story 

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सन्1920में उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पहले किसान मार्च का आयोजन किया।1923में वहअखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव चुने गए।1929में नेहरू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र के अध्यक्ष चुने गए। नेहरू आजादी के आंदोलन के दौरान बहुत बार जेल गए।1920से1922तक चले असहयोग आंदोलन के दौरान उन्हें दो बार गिरफ्तार किया गया। know nehru life story 

नेहरू जहांगांधीवादी मार्ग से आजादी के आंदोलन के लिए लड़े वहीं उन्होंने कई बारसशस्त्रसंघर्ष चलाने वाले क्रांतिकारियों का भी साथ दिया। आजाद हिन्द फौज के सेनानियों परअंग्रेजों द्वारा चलाए गए मुकदमे में नेहरू ने क्रांतिकारियों की वकालत की। उनके प्रयासोंके चलते अंग्रेजों को बहुत से क्रांतिकारियों का रिहा करना पड़ा। 27 मई, 1964 को उनका निधन हो गया. know nehru life story 

( लाल बिहारी लाल )




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