मन की गीता सहित तीन आध्यात्मिक पुस्तकों का लोकार्पण




उतराखंड चम्पावत के बयोवृद्ध लेखक महेश चंद्र सिंह अधिकारी द्वारा रचित तीन आध्यात्मिक पुस्तकें –मन कीगीता, आद्याशक्ति सहस्त्रोत्तर स्त्रोत तथा आरती एवं भजन का संग्रह का लोकार्पणवरिष्ठ गजलकारा ड़ा. सीमा गुप्ता, वरिष्ठ साहित्यकार डा. बिक्रम चोपड़ा,दिल्लीरत्न एवं वरिष्ठ साहित्यकार लाल बिहारी लाल, एक्जिम बैंक के हिंदी अधिकारी श्रीमतीअर्चना मदान तथा अनुराधा प्रकाशन के संपादक मनमोहन शर्मा शरन द्वारा गांधी शातिप्रतिष्ठान ,नई दिल्ली में किया गया। विमोचन किया गया। mann ki gita book published 

इस अवसर पर अनुराधाप्रकाशन द्वारा लेखक महेश अधिकारी सहित कई समाजसेवियों जिसमें सर्व श्री रामेश्वरदयाल, अनिल शर्मा, अजस भारद्वाज तथा चारु चंद्र को सम्मानित किया गया । इस अवसर परएक सरस कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। mann ki gita book published 

 मजदूर दिवस पर लाल बिहारी लाल के कुछ दोहे

जिसमें- सर्व श्री जसवंत सिंह तंवर,आशुतोषदिवेदी, डा. सरला सिंह, हीरेन्द्र चौधरी, लाल बिहारी लाल,डा.सीमा गुप्ता तथा डा.कृष्णानंद तिवारी आदि नें काब्यपाठ कर सभी श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम कीअध्यक्षता अर्चना मदान ने की जबकि मंच संचालन प्रियंका ने।कार्यक्रम के अंत मेंअनुराधा प्रकाशन के संपादक मनमोहन शर्मा ने सभी अतिथियों एवं आगन्तुको का हार्दिकधन्यावद किया। mann ki gita book published 

इसे भी पढ़ें, मजदूर दिवस पर लाल बिहारी लाल के दोहे

दुनिया के हर कामको,देते सदा अंजाम।

चाहे कोई कुछ कहे,लेते नहीं विराम ।1।

इनके ही सम्मानकी बाते करते लोग।

इनके नहीं नसीबमें,जीवन को ले भोग।2।

कहीं तोड़े पत्थरतो, कही तोड़ते हार।

लाल तरस नहीखाये,अजब गजब ब्यवहार।3)

पल-पल करते चाकरी,रोटी खातिर रोज।

लाल जाने कब अइहें,जीवन में सुख भोग।4।

मजदूरों के जोग से दुनियाबने महान।

चाहे बात विनाश कीया हो फिर निर्माण।5।

इसे भी पढ़ें, विश्व स्वास्थ्य दिवस पर लाल बिहारी लाल की कविता

खान-पान की कमी से, रोज बिमारी होय।
खाना खाओं समय पर,रोग कभी ना होय।1।
रात को सोना जल्दी,सुबह करो नादेर।
वरना कोई रोग अब , लेगा तुमकोघेर ।2।
हाथ खाने से पहले ,मुँह खाने केबाद।
निश-दिन धोना सीख लो,जीवन रहेअबाद।3।
मेहनत करना सीखों , रोग रहे तबदूर।
जीवन हो आनंदमय,काया सुखभरपूर।4।
रोना-धोना छोड़ के ,सीखों करनामाफ।
रोग “लाल”उसी दिन से ,हो जायेगाहाफ।5।
ब्यस्त रहो मस्त रहो,फटके ना तबरोग।
“लाल”संग-संग मिल के,जीवन को लोभोग।6।
परम साध संतोष है, सब साधोंमें खास।
लाल अमल कर देख लो, जीवन आयेरास।7।
हरा साग सब्जी खाओं.,रहो सुखी दिनरात।
निश दिन रोग दूर रहे,”लाल”मिले सौगात।8।

( प्रवीण कुमार )