मातृ दिवस पर लाल बिहारी लाल के दोहे

=


माँ जीवन का सार है, माँ है तो संसार। mothers day lal bihari lal poem
माँ बिन जीवन लाल का,समझो है बेकार।1।

माँ की ममता धरा पर, सबसे है अनमोल। mothers day lal bihari lal poem
माँ जिसने भूला दिया,सब कुछ उसका गोल।2।

माँ सम गुरू नहीं मिले, ढ़ूढ़े इस संसार। mothers day lal bihari lal poem
गुरु का जो मान रखा,नैया उसका पार।3।

माँ के दूध का कर्जा, चुका न पाया कोय। mothers day lal bihari lal poem
जन जो कर्ज चुका दिया,जग बैरी ना होय।4।

माँ पीपल की छांव है,माँ बगिया के मूल। mothers day lal bihari lal poem
माँ जीवन का सार है, हरे लाल के शूल।5।

माँ से जग संसार है,माँ से जीवन मूल। mothers day lal bihari lal poem
माँ बिना मोल कुछ नहीं,मुर्झाये सब फूल।6।

मजदूर दिवस पर लाल बिहारी लाल के  दोहे

दुनिया के हर कामको,देते सदा अंजाम। mothers day lal bihari lal poem

चाहे कोई कुछ कहे,लेते नहीं विराम ।1।

इनके ही सम्मानकी बाते करते लोग। mothers day lal bihari lal poem

इनके नहीं नसीबमें,जीवन को ले भोग।2।

कहीं तोड़े पत्थरतो, कही तोड़ते हार। mothers day lal bihari lal poem=
लाल तरस नहीखाये,अजब गजब ब्यवहार।3)
पल-पल करते चाकरी,रोटी खातिर रोज।

लाल जाने कब अइहें,जीवन में सुख भोग।4।

मजदूरों के जोग से दुनियाबने महान।

चाहे बात विनाश कीया हो फिर निर्माण।5। 

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर लाल बिहारी लाल की कविता

खान-पान की कमी से, रोज बिमारी होय। 
खाना खाओं समय पर,रोग कभी ना होय।1।
रात को सोना जल्दी,सुबह करो नादेर। 
वरना कोई रोग अब , लेगा तुमकोघेर ।2।
हाथ खाने से पहले ,मुँह खाने केबाद।
निश-दिन धोना सीख लो,जीवन रहेअबाद।3। 
मेहनत करना सीखों , रोग रहे तबदूर।
जीवन हो आनंदमय,काया सुखभरपूर।4।
रोना-धोना छोड़ के ,सीखों करनामाफ।
रोग “लाल”उसी दिन से ,हो जायेगाहाफ।5। 
ब्यस्त रहो मस्त रहो,फटके ना तबरोग।
“लाल”संग-संग मिल के,जीवन को लोभोग।6।
परम साध संतोष है, सब साधोंमें खास।
लाल अमल कर देख लो, जीवन आयेरास।7।
हरा साग सब्जी खाओं.,रहो सुखी दिनरात।
निश दिन रोग दूर रहे,”लाल”मिले सौगात।8।

( लाल बिहारी लाल )