सभी जियें आपन लड़कपन ” के साथ कवि गोष्ठी सम्पन्न




संस्कार भारती नंदग्राम इकाई द्वारा बी.एस. फार्म मे आहूत साहित्य संगोष्ठी हिन्दी साहित्य मनीषी महेश सक्सेना जी और डॉ मधु भारतीय की अध्यक्षता के साथ ब्रजनन्दन पचौरी जी के संतुलित संचालन मे आयोजित हुई । संस्कार भारती की यह साहित्यसंगोष्ठी कई मायने मे अद्वितीय रही । आज इस गोष्ठी मे जिसका विषय “मेरा बचपन “था , उस पर सभी कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएँप्रस्तुत की । सभी जियें आपन लड़कपन ” के साथ कवि गोष्ठी सम्पन्न sabhi jiyen aapan ladakpan

आज गोष्ठी मे हिन्दी , भोजपुरी और संस्कृत भाषाकी त्रिवेणी का अद्भुत संगम अविस्मरणीय रहा । आज गोष्ठी की शुरुआत से ही सभीकवियों ने अपनी कविता के माध्यम से बचपन के विभिन्न आयामो को याद किया , जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ने” सभे जिएला आपन लड़कपन ” से एकऊँचाई तक पहुंचाया । सभी जियें आपन लड़कपन ” के साथ कवि गोष्ठी सम्पन्न sabhi jiyen aapan ladakpan

मातृ दिवस पर लाल बिहारी लाल के दोहे

गोष्ठी मे श्रीमती बीणा मित्तल , श्री चेतन आनंद, श्रीमती इंदु शर्मा जी, डॉ राजीव पांडेय , डॉ जयप्रकाश मिश्र , भूपेंद्र त्यागी”मित्र” , डॉ मनोज कुमार , पियूष मालवीय, श्री इन्द्र प्रसाद अकेला , श्री ब्रज नन्दन पचौरी , श्री बी एस शर्मा”बशिष्ठ” सहित करीब 27 कवियोंने कार्यक्रम को नई ऊँचाई दी । अंत मे डॉ मधु भारतीय जी की बचपन के गीत के साथकार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ । धन्यवाद ज्ञापन श्री ब्रज नन्दन पचौरी जी ने किया। sabhi jiyen aapan ladakpan

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मजदूर दिवस पर लाल बिहारी लाल के  दोहे

दुनिया के हर कामको,देते सदा अंजाम।

चाहे कोई कुछ कहे,लेते नहीं विराम ।1।

इनके ही सम्मानकी बाते करते लोग।

इनके नहीं नसीबमें,जीवन को ले भोग।2।

कहीं तोड़े पत्थरतो, कही तोड़ते हार। 
लाल तरस नहीखाये,अजब गजब ब्यवहार।3)
पल-पल करते चाकरी,रोटी खातिर रोज।

लाल जाने कब अइहें,जीवन में सुख भोग।4।

मजदूरों के जोग से दुनियाबने महान।

चाहे बात विनाश कीया हो फिर निर्माण।5। 

( लाल बिहारी लाल )