मायावती है असली दलित कोविंद के सहारे 2019 का चुनाव नहीं जीत पायेगी भाजपा : कांग्रेस




 रामनाथ कोविंद देश के 14 वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए है। ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा की अगुआई वाले राजग गठबंधन को यह जीत उन्हें ताकत देगी। भाजपा को मिली इस कामयाबी के दूरगामी राजनीतिक असर होंगे। कांग्रेस का मानना है कि रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति चुनाव से दलित वोट भाजपा के साथ नहीं आएगी क्योंकि दलित अभी भी मायावती के साथ हैं। 2019 election win bjp

जिस प्रकार से मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया इससे तो यह तय हो गया कि उन्हें कोई पद का मोह नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि भले ही लोकसभा में उन्हें 19.6 फीसदी वोट मिले थे, बसपा को कोई सीट हासिल नहीं हुई है वहीं उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में 22.2 फीसदी वोट हासिल हुई। हां इस चुनाव में भी बसपा को केवल 19 सीटें ही मिली। लेकिन अभी भी दलित वोट मायावती के साथ है। 2019 election win bjp




मायावती ने जिस प्रकार से राज्यसभा में दलितों के मुद्दे को उठाया है इससे तो यह तय है कि दलितों की सही हमदर्द नेता हैं। कांग्रेस का मानना है कि भाजपा को लग रहा है कि कोविंद से दलित उनके साथ होगा तो यह गलत अनुमान है क्योंकि भावी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कभी जनाधार वाले नेता नहीं रहे हैं। जिससे दलित उनसे जुड़े हो। 2019 election win bjp

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कहना है कि वहीं मायावती दलितों और गैर दलितों से जुड़े मुद्दों को पूरी संजीदगी के साथ जोर शोर से उठाती रही हैं। बसपा का सोशल इंजीनियरिंग किसी भी दल से बेहतर है। निश्चिततौर पर इससे बसपा को नया जीवन मिलेगा। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बसपा को सोशल इंजीनियरिंग के अपने प्रयोगों पर फिर से विचार करना होगा। 2019 election win bjp

पार्टी केवल जातिगत गठजोड़ के दम पर आगे नहीं बढ़ सकती है। हां यह भी तय है कि पहचान की सियासत में यकीन रखने वाली मायावती के लिए हिंदुत्व की व्यापक अपील के इस दौर में अपनी खोई राजनीतिक जमीन हासिल करना आसान नहीं होगा। इसके लिए इन्हें अब जमीन पर उतरकर आम आदमी से जुड़ना होगा और पार्टी की सोच को व्यापकता से जोड़ना होगा।2019 election win bjp

जानिए कैसे नियुक्त होते है राष्ट्रपति?

 बीजेपी ने 2019 चुनाव को लेकर राष्ट्रपति पद का जो दांव खेला उसका तोड़ कांग्रेस-मायावती द्वारा किये जा रहे नए हथकंडो से कर सकती है। कांग्रेस ने तो यहाँ तक कह दिया था कि कोविंद दलित ही नहीं बल्कि RSS का एजेंट रहा है। कांग्रेस को ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी जबकि उन्हें पता था कि राम नाथ कोविंद देश के राष्ट्रपति बनने वाले है। 2019 election win bjp

राष्ट्रपति चुनाव में राजग के उम्मीदवार रामनाथ कोबिंद ने 65 फीसदी से अधिक वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की। वह देश के 14 वें राष्ट्रपति होंगे। राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद की जीत देश के इतिहास में एक नया अध्याय है। 2019 election win bjp 
ऐसा माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से देश में जो बदलाव की शुरुआत हुई है कोविंद की भारी जीत को उसकी का विस्तार माना जा सकता है। देश के राजनीति में पहले कांग्रेस की अहम भूमिका होती थी लेकिन अब वह तस्वीर लोकसभा चुनाव के बाद लगातार तेजी से बदल रही है। 2019 election win bjp
दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनाव को छोड़ दे तो बाकी राज्यों में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की है। और खास बात यह है कि तीन बड़े संवैधानिक पदों राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष पद पर भगवा खेमे की पसंद साफ तौर पर दिख जाती है। 2019 election win bjp 

रामनाथ कोविंद की जीत भाजपा की अगुवाई वाली राजग गठबंधन को नई ताकत देगी। 2019 के आम चुनाव से पहले भाजपा को मिली इस कामयाबी के दूरगामी राजनीतिक असर होंगे। गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनवा में राजग के पक्ष में क्रास वोटिंग हुए जिससे भाजपा में उत्साह आ गया है। 2019 election win bjp 
जिस प्रकार से विपक्ष का समर्थन भाजपा को मिला है इससे देश भर में जमीन मजबूत करने की कोशिश में एक कदम और बढ़ गया है। निश्चिततौर पर भाजपा अब वहां भी मजबूत रूप से उभरेगी जहां पहले भाजपा का कोई आधार नहीं था। 2019 election win bjp 

वहीं दूसरी तरफ कोविंद के जरिए मिली सियासी जीत से पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह का कद और बढ़ गया है और यहां तक कि मोदी-अमित शाह की जोड़ी की कार्यशैली और दूरदृष्टि को लोहा मानने वाले लोगों की तादात और बढ़ गई है। 2019 election win bjp
फिलहाल दोनों के कामकाज के तौर तरीके पर कोई उंगली भी उठाने वाला नहीं है। भाजपा में कोई कामयाबी और नाकामयाबी का असर सीधे तौर पर मोदी और अमित शाह की जोड़ी पर होता है। निश्चिततौर पर पार्टी के और बड़े फैसले लेने के लिए यह जोड़ी और मजबूत होकर उभरी है।  2019 election win bjp

 

पार्टी में यदा कदा विरोध करने वालों को झटका लग सकता है। लेकिन जिस प्रकार से अमित शाह अपने विरोधी को भी अपना कायल बनाते हैं इसे सभी मान रहे हैं।

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