अंगार वाले बाबा को देखने उमडी श्रद्धालुओं की भीड़




धर्म के नाम पर लोग विभिन्न तौर-तरीकों से पूजा अर्चना करते दिखाई देते हैं। लेकिन कई बार कुछ लोग ऐसे तरीके अपनाते हैं कि देखकर हर कोई दंग रह जाए। ऐसा ही एक मामला पठानकोट में देखने को मिला है। गर्मी के मौसम में आग के पास जाना तो दूर कोई ऐसा सोचना भी नहीं चाहेगा। लेकिन एक बाबा कडक़ती धूप में जलते अंगारों के पास बैठकर विश्व मंगल की कामना कर रहा है। हम बात कर रहे हैं शहर के सर्कुलर रोड स्थित जोगी बंगला डेरे की। aangaar vaale baba 

सैंकड़ों श्रद्धालु रोज यहां आते हैं

हरियाणा से आए बाबा मोहित नाथ यहां जलते अंगारों के पास रोजाना तीन घंटे बैठ कर तपस्या करते हैं। बाबा मोहित नाथ पिछले एक महीने से ऐसा कर रहे हैं और अगले 11 दिनों तक ऐसा करेंगे। 41 दिनों की इस तपस्या के पीछे उददेश्य सिर्फ विश्व मंगल की कामना करना है। रोजाना सैंकड़ों श्रद्धालु उनके दर्शन करने आ रहे हैं। aangaar vaale baba 

हरियाणा के रोहतक जिले के रहने वाले बाबा मोहित नाथ ने बताया कि इस प्रकार की तपस्या को गयारह धूनी कहते हैं। इसमें 11 धूनियों का घेरा बनाया जाता है। धूनियों में गाय के गोबर के थेपले का ढेर लगाकर उसे जला दिया जाता है। 11 धूनियों के ताप के कारण घेरे के अंदर बैठना तो दूर घुसना भी मुश्किल होता है। aangaar vaale baba 

यह डेरा गुरू गोरखनाथ का डेरा है

लेकिन यही असली तपस्या है। वह रोज तीन घंटे 11 धूनी में बैठते हैं। ऐसा करके विश्व मंगल की कामना की जाती है। जिस जगह पर यह गयारह धूनी लगाई जाती है उसके आसपास के क्षेत्र का काफी भला होता है। लोगों की बिमारियां, दुख-तकलीफें दूर होती हैं। बाबा मोहित नाथ ने बताया कि वह गुजरात, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों में आठ बार ऐसी तपस्या कर चुके हैं। aangaar vaale baba 

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सालों पुराना है जोगी बंगला डेरा डेरे के संचालक पीर रंधीर नाथ ने बताया कि यह डेरा गुरू गोरखनाथ का डेरा है। गोरखनाथ जी ने यहां पीपल के पेड़ के नीचे किसी समस्य तपस्या की थी। यह पेड़ आज भी यहां लगा हुआ है। सैंकड़ों श्रद्धालु रोज यहां आते हैं। aangaar vaale baba