एयर इंडिया को बेचना ‘फायदे का सौदा’: मोदी सरकार




Air India Quick sale एयर इंडिया को बेचना ‘फायदे का सौदा’

55,000 करोड़ रुपए के कर्ज में डूबी एयर इंडिया में सरकार ने विनिवेश की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। विनिवेश प्रक्रिया इसी वित्तीय वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है।एयर इंडिया में विनिवेश के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सैद्धांतिक मंजूरी दे थी। विनिवेश के लिए मंत्रियों का समूह का गठन भी किया गया था जिसके अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली हैं। सरकार शत प्रतिशत विनिवेश नहीं करना चाहती बल्कि निंयत्रण हिस्सेदार खुद बने रहना चाहती है। ऐसा माना जा रहा है कि टाटा संस ने एयर इंडिया में विनिवेश के लिए रूचि दिखाई है। Air India Quick sale

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इसी मद्देनजर रतन टाटा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात भी हो चुकी है। गौरतलब है कि 1953 के राष्ट्रीयकरण पहले एयर इंडिया का परिचालन टाटा ही करता था। टाटा ग्रुप पहले से देश में एविएशन सेक्टर में है। एयर एशिया इंडिया और सिंगापुर एयरलाइंस के साथ ज्वॉइंट वेंचर में विस्तार में निवेश किया है। इसके अलावा इंडिगो ने भी एयर इंडिया के अंतरराष्ट्रीय परिचालन और एयर इंडिया एक्सप्रेस में रुचि है। Air India Quick sale




 

गौरतलब है कि एयर इंडिया अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरती है जिसकी स्थापना 1930 में हुई है। जिसपर 55,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। 2012 में यूपीए सरकार ने 30,000 करोड़ रुपे का बेल आउट पैकेज भी दिया था। लेकिन किसी भी प्रकार से एयर इंडिया को घाटे से उबारा नहीं जा सका। यहां तक कि मोदी सरकार ने एयर इंडिया के लिए अधिकारियों की टीम को भी लगाया है लेकिन यह साफ हो गया कि विनिवेश ही एक मात्र रास्ता है। राजग सरकार की पहले भी यह नीति रही है कि तेजी से विनिवेश किया जाए। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में तो विनिवेश मंत्रालय का गठन भी किया गया था। लेकिन उसके बाद यूपीए सरकार ने इस मंत्रालय को खत्म कर दिया। अब जबकि फिर से राजग की सरकार है भले ही विनिवेश मंत्रालय न बने लेकिन घाटे में चले रह उपक्रम को लाभ की स्थिति में लाने के लिए विनिवेश एक सरल सहज उपाय है। एयर इंडिया को विनिवेश कर लाभ की स्थिति में पहुंचाना सरकार का प्रयास है।

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