कश्मीर मैं हिन्दुओ को ढूंढ -2 कर पीटा जा रहा, अमरनाथ यात्रियों को खतरा



आतंकी बुरहान बानी के मरने के बाद जो घाटी में उपद्रवियों ने आतंक मचाई  उसके बारे में जानकार आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे। चारों तरफ हाहाकार और चीत्कार कि गूंज घाटियों में गूंज रही थी। पुलिस और सुरक्षा बलों के बाद उपद्रवियों ने अपना निशाना अमरनाथ यात्रियों को बनाया। amarnath devotee facing death threat 

अमरनाथ यात्रा से लोटे यात्रियों के मुंह से वहां की घटना के बारे सुनकर रूह काँप गया। एक यात्री के अनुसार झाड़ियों में छुपे उपद्रवी जैसे ही हमारी गाड़ियों को आते देखा उन्होंने हमारे ऊपर पत्थर बरसाने सुरु कर दिया। amarnath yatra

हमारे गाडी का शीशा टूट गया मेरे साथियों को चोट आई दो यात्री तरुण पाल एवं विजय नारायण के शिर में चोट लगी खून के फब्बारे छूट रहे थे। दीपक शर्मा के अनुसार उपद्रवी शायद हमारी गाड़ियों के नंबर प्लेट देखकर हमे निशाना बनाया था। amarnath devotee facing death threat 

हम गाडी को बेतहासा लेकर भागे किसी तरह सेना के बेस कैंप पर पहुंचकर हमने अपनी जान बचायी। यात्रा पर गयी रजनी ने कहा की उन्होंने हमारी गाडी रोकी गाली- गलोज किया हमारे शीशे तोड़े बहुत विनती करने के बाद उन्होंने हमे छोड़ा।

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वैसे उन्होंने हम सबको मारापीटा एवं बार बार यही पूछा की तुम लोग हिन्दू है और अमरनाथ यात्रा को आया है। वो हमें भद्दी भद्दी गालियां दे रहे थे। सेना जब आगे मिली और भयभीत हमलोगों ने उनसे सहायता मांगी तो उन्होंने भी हमें सहायता देने से इंकार करते हुये रातोंरात जम्मू जाने की हिदायत दी। amarnath devotee facing death threat 

रास्ते  में जगह जगह खून बिखरे हुए थे। पंजाबियों के ढाबे जले हुए थे,पूरा वातावरण डरावना लग रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे अब हमारा वापिस जाना सम्भव नहीं है। जो कुछ भी हमे और हमारे साथियों को भोगना पड़ा। amarnath yatra

कितने मिन्नतें की तब जाकर उन्होंने हमे छोड़ा  amarnath devotee facing death threat 

वह एक भयानक स्वप्न के जैसा था। जो की एक कड़वी सच्चाई है। उस भयानक मंजर को याद करके हम अब भी हम काँप उठते हैं। सहारनपुर से पहलीबार अमरनाथ यात्रा पर गई सुहानी के परिवार के लोगों ने बताया की मनीगाम के पास उपद्रवियों ने हमे अपना निशाना बनाया। amarnath devotee facing death threat 

कितने पैर हाथ पकड़े मिन्नतें की तब जाकर उन्होंने हमे छोड़ा। गाजियाबाद लौटे एक दल के सहयात्री के कुमार ने कहा की जैसे ही घाटी में बबाल मचा हम लोग उस समय बालटाल में थे। हमे दो दिनों तक बालटाल में रोककर रखा गया। amarnath yatra

उसके बाद हमें आगे बढ़ने को कहा गया अनंतनाग के पास पहुंचते ही घात लगाकर बैठे उपद्रवियों ने हमपर पथ्थर बरसाने लगे। कुछ दूर पर ही पुलिस थी लकिन हमे कोई सहायता नहीं मिल रहा था। वो हमे पथ्थर मारते एवं गाली देते हमारी गाड़ी के पीछे दौड़ते रहे। हमारे गाडी का शीशा टूट गया हमे हल्की चोटें आयी। amarnath devotee facing death threat 

हमने किसी तरह बेसकैंप ऑफ़ आर्मी के शरण में जाकर अपनी जान बचाई। वैसे आर्मी भी स्थिति को लेकर चिंतित एवं रणनीतिकारों से दुखी थे। राजस्थान के दीनबन्धु ने कहा की बालटाल से लेकर श्रीनगर तक पत्थर बरसते रहे। ऐसा लगता था जैसे साक्षात भोले नाथ उन आतताइयों से हमे बचा रहे थे। amarnath devotee facing death threat

( हरि शंकर तिवारी )