न बुआ न बबुआ यूपी में खिला कमल के फुलवा !




जी हां, मोदी लहर से पूरा यूपी और उत्तराखंड मोदीमय हो गया है। क्या हिन्दू, क्या मुस्लिम, क्या सिक्ख, क्या ईसाई, सबने दिल खोलकर पीएम मोदी का स्वागत और सम्मान किया है। जंहा विपक्ष धर्म के नाम पर देश की जनता को बांटने पर तुली थी। वही देश की जनता ने पीएम मोदी के सर्मथन में वोट देकर विपक्ष को करारा जबाब दिया है। जिससे विपक्ष की बोलती बन्द हो गयी है। कल तक जंहा ये विपक्षी नेता बड़ी-बड़ी बाते कर रहे थे। आज ये सवालों का जबाब नहीं दे पा रहे है। आखिर यूपी की जनता ने उन्हें क्यों सबक सिखाया है। bjp win uttar pradesh election 2017

दो दिन पूर्व ही एग्जिट पोल में बीजेपी को यूपी और उत्तराखंड में सबसे बड़ी पार्टी बताया गया था। जिसके बाद विपक्षी नेता ने तमाम तरह के झूठे आरोप लगाए की एग्जिट पोल फर्जी है। बिहार की तरह यूपी में भी बीजेपी हारेगी, लेकिन जो आंकड़े रुझान से निकालकर सामने आ रहे है। उसके अनुसार बीजेपी यूपी में पूर्ण बहुमत से जीत रही है। कुल 403 विधान सभा सीट में बीजेपी 310 सीट पर जीत रही है। वही सपा और कांग्रेस की गठबंधन को केवल 70 सीट पर आगे है। जबकि बबुआ 16 सीट पर सिमट के रह गयी है। bjp win uttar pradesh election 2017

 केजरीवाल के सपनों को पूरा नहीं होने दिया

कुछ ऐसा ही माहौल पहाड़ों पर भी है। जंहा फिर से कमल का फूल खिला है। इससे पहले कांग्रेस के हरीश रावत फतह की दावेदारी कर रहे थे लेकिन आज के चुनाव परिणाम से वो हताश और निराश है। यदि पिछले साल के मार्च महीने को याद किया जाये तो उस समय उत्तराखंड में राजनैतिक संकट गहरा गया था। जिसका नतीजा सुप्रीम कोर्ट की देख रेख में आया। जब हरीश रावत ने विश्वास मत हासिल कर लिया था। हालांकि, प्रदेश की जनता ने ठान लिया था कि हरीश रावत को सबक सिखाना है और नतीजा आज सामने है। उत्तराखंड में भी कमल का फूल खिल चूका है। bjp win uttar pradesh election 2017

बीजेपी को मिलेगा पूर्ण बहुमत और योगी बनेंगे यूपी के सीएम : यूपी मुस्लिम

इस चुनाव में सबसे बड़ा और आधुनिक नुकसान दिल्ली के सीएम केजीवाल के पार्टी को हुआ है। जिस तरह से उन्होंने दिल्ली फतह कर लिया था। उन्हें ऐसा लगा कि वो पंजाब और गोवा के जरिये इसकी शुरुआत देश स्तर पर करेंगे लेकिन दिल्ली की जनता की तरह पंजाब और गोवा की जनता मुर्ख नहीं है। वे केजरीवाल के सपनों को पूरा नहीं होने दिया। अब केजरीवाल को आगामी दिल्ली नगर निकाय चुनाव का डर सताने लगा है। 

( प्रवीण कुमार )