इजरायल की तर्ज पर भारत को देना होगा अपने पड़ोसियों को मुहतोड़ जबाब




भारत लगातार इस कोशिश में रहता है कि उसकी पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध हो। इसके तहत ईस्ट पॉलिसी पर भी काफी काम किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस प्रकार से अपने शपथ ग्रहण में पड़ोसियों को बुलाया और उससे संबंध प्रगाढ़ करने की कोशिश की उससे साफ जाहिर हो गया कि भारत इनसे अच्छे संबंध चाहता है। लेकिन चीन किसी भी तरह भारत को किसी न किसी मोर्चे पर घेरना चाहता है। चीन जिस तरह से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है तय है कि इससे भारत प्रभावित होगा। cpec par bharat ko najar rkhna hoga 

अफगानिस्तान पहले से ही भारत के पक्ष में है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईस्ट पॉलिसी के तहत पिछले तीन वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य प्रोजेक्टस पर कार्य किया है। वही चीन ने वन वेल्ट वन रोड यानी ओबीओआर के तहत जिस प्रकार से निवेश बढ़ाया है। इससे भारत को सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि यह ओबीओआर कश्मीर अधिकृत पाक से होकर गया हुआ है। cpec par bharat ko najar rkhna hoga 

ओबीओआर की बैठक 14-15 मई को आयोजित की गई है जिसमें कंबोडिया, लैंड लॉक कंट्री लाओस, इंडोनेशिया और म्यामांर हिस्सा लेने जा रहे हैं। चीन, पाकिस्तान और नेपाल तो इसमें भाग ले ही रहा है। ऐसे में भारत को काफी सतर्कता से चीन के साथ नेपाल और पाकिस्तान पर नजर रखनी पड़ेगी। cpec par bharat ko najar rkhna hoga 

मध्य एशिया में भी चीन को टक्कर दिया जा रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की लुक ईस्ट नीति को ऐक्ट नीति पर जोर देकर इस क्षेत्र में कई बदलाव लाए हैं। जिससे भारत दक्षिण पूर्वी देशों से कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ाया है लेकिन अब जब चीन ने ओबीओआर के पर आगे बढ़ा है तो तय है कि भारत को इस पर खास नजर रखनी पड़ेगी। cpec par bharat ko najar rkhna hoga 

जिसे बीफ खाना है वो बंगाल आए : ममता बनर्जी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ने चीन की इस नीति का जवाब तलाशने शुरू किए हैं जिसके अतंर्गत मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देश दक्षिण कोरिया, जापान को अपने पक्ष में करने की नीति पर चल पड़े हैं साथ ही मध्य एशिया में भी चीन को टक्कर दिया जा रहा है। जिसमें अफगानिस्तान पहले से ही भारत के पक्ष में है। cpec par bharat ko najar rkhna hoga