पाकिस्तान हैवानों का देश है जहाँ मानवता कब की मर चुकी है : सरबजीत परिवार




कुलभूषण जाधव के परिवार के साथ हुए अशिष्ट और आपत्तिजनक व्यवहार के लिए जहां देश भर में रोष देखा जा रहा है। वही मोदी सरकार पाकिस्तान के असली रूप को वैश्विक मंच पर लाने की कोशिश में जुट गई है। इस क्रम में मोदी सरकार की माने तो पाकिस्तान ने साबित कर दिया है कि कुलभूषण जाधव को जबरन फसाया जा रहा है। वे बेकसूर है। जाधव की कुशल स्वदेश वापसी के लिए भारत सरकार की तरफ हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। dalbir kaur told pak visit story

मेरी कृपाण को उतरवा कर जूते के सामने रखवाए गए। dalbir kaur told pak visit story

वही इस बारे में सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने अपने पाकिस्तान यात्रा को याद कर रोने लगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मानवता जीवित नहीं है सब हैवान हो गए है। मैं सरबजीत की पत्नी और दो बेटियों के साथ पाकिस्तान गई थे। जहाँ लाहौर एयरपोर्ट के बाहर काफी देर के लिए मेरी गाड़ी रोकी गई। जिस कारण हमलोग को रुकना पड़ा। उस समय मीडिया वाले हमसे तरह तरह के सवाल पूछने लगे। उन्होंने अपने कैमरा को लाइव मोड में डाल दिया था। dalbir kaur told pak visit story

मैं, सरबजीत की पत्नी और दो बेटियां सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक सरबजीत से मिलने का इंतज़ार किये। उसके बाद मुझे मिलने दिया गया लेकिन पाकिस्तान ने उसी तरह की हरकत की। जैसा की जाधव परिवार के साथ किया। सरबजीत की बच्चियों की चोटियां खुलवाई गई, पत्नी की बिंदी और चूड़ियां उतरवाए गए, उनके सिंदूर को रुमाल से पोंछ दिया गया। मेरी कृपाण को उतरवा कर जूते के सामने रखवाए गए। जबकि मैं इसका विरोध करती रही फिर भी वे नहीं माने और कृपाण को जूते के पास ही रखने को कहा। मैं सिंदूर नहीं हटाने का भी अनुरोध कि लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी। मैं सब कुछ छोड़ अपने भाई को देखना चाहती थी। इसलिए मैं बहसबाज़ी छोड़ दी क्योंकि मुझे अपने भाई से मिलना था। dalbir kaur told pak visit story

2 मई 2013 को उनकी मौत हो गई थी। dalbir kaur told pak visit story

जब मैंने सरबजीते को देखा तो रोने लगी। हालांकि, मेरे और सरबजीत के बीच शीशे की दीवार नहीं बल्कि जेल की सलाखें थी। मैं अपने भाई को चूमना चाहती थी उसे गले लगाना चाहती थी लेकिन मेरे सारे अरमां टूट गए। उन दरिंदों ने मेरे भाई को जानवर की तरह रखा था। जब हमने सरबजीते को खाना देना चाहा तो सरबजीते ने एक कटोरा हमारे सामने बढ़ा दिया। देख मेरा कलेजा फट गया था। मैं खुद को रोने से रोक नहीं पा रही थी। मैं मरते दम तक सरबजीते के उस कटोरा वाले चेहरे को भूल नहीं पाऊँगी। इसके बाद दलबीर रोने लगी। dalbir kaur told pak visit story

कुछ पल के बाद फिर दलबीर ने कहा कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि जाधव की माँ और पत्नी के साथ भी ऐसा व्यवहार किया जाएगा क्योंकि सरबजीत का केस पाकिस्तान में था लेकिन जाधव का केस अंतराष्ट्रीय न्यायालय में है। इसलिए उनके साथ इस दुर्वव्हार की उम्मीद नहीं थी लेकिन पाकिस्तान ने फिर से अपना असली चेहरा दिखाया है। हालांकि, हमें अपने भाई से मिलने के लिए 18 साल तक इन्तजार करना पड़ा। वही जाधव परिवार को 22 महीने में जाधव से मिलने दिया गया। ये जाधव परिवार के लिए थोड़ी सी राहत वाली खबर थी। dalbir kaur told pak visit story

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बता दें सरबजीत कौर को पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने 1990 में लाहौर और फ़ैसलाबाद में हुए बम धमाकों के लिए फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन फांसी नहीं दी गई थी। वही जब सरबजीत जेल में अपनी सजा काट रहा था उस दरम्यां पाकिस्तान सरकार के इशारे पर कैदियों ने सरबजीत पर हमला किया था। इस हमले के 6 दिन बाद यानि की 2 मई 2013 को उनकी मौत हो गई थी। dalbir kaur told pak visit story

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