पति की लम्बी उम्र के लिए ऐसे करें कजरी तीज माता की पूजा





धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कजरी तीज पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष रविवार 21 अगस्त 2016 को कजरी तीज मनाई जाएगी। कजरी तीज को ‘हरितालिका तीज’ भी कहा जाता है। devotional kajari teej story

इस पर्व के एक दिन पूर्व अर्थात भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की द्वितीया को रतजगा किया जाता है। महिलायें इस रात्रि में कजरी खेलती एवम गाती है। कजरी खेलना एवम गाना दो अलग-अलग विधि है। कजरी के गीतों में जीवन के विविध पहलु जैसे प्रेम, मिलान, विरह, सुख-दुःख आदि का समावेश होता है। devotional kajari teej story

कजरी तीज पर्व का स्वरूप  devotional kajari teej story

कजरी तीज पर्व के कुछ दिन पूर्व से सुहागिन नदी-तालाब आदि से मिट्टी लाकर उस मिट्टी से एक पिंड बनाती है और उस पिंड में जौ के दाने बोती है। मिट्टी से बने इस पिंड में प्रतिदिन पानी डालती है। जिससे जौ के पौधे निकल आते है।  devotional kajari teej story

जौ के इस पौधे को कजरी पर्व के दिन लड़कियां अपने भाई तथा घर के बुजुर्गों के कान पर रखकर उन्हें प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करती है। इस प्रक्रिया को ‘जरई खोंसना’ कहा जाता है। कजरी का यह स्वरूप मात्र ग्रामीण क्षेत्रों में सिमित है। यह विधि गायन करते हुए किया जाता है जो देखने में अत्यंत मोहक लगता है।  devotional kajari teej story

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प्राचीन काल से कजरी-गायन की परम्परा है। भक्तिकाल के भक्त सूरदास, प्रेमधन जी आदि कवियों ने भी कजरी के मनोहर गीत की रचना की थी। कजरी तीज पर्व माहेश्वरी समाज का विशेष पर्व है।हिन्दू धर्म में त्यौहार का विशेष महत्व है। इस पर्व को महिलाएं सुख, सौभाग्य और पति की लम्बी उम्र के लिए रखती है। पुराणों में वर्णित है कि अखंड सुहाग के लिए इस दिन शिव-पार्वती का विशेष पूजन करती है। इस त्यौहार को महिलाएं बड़े ही उत्साह से मनाती है।

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