ऐसे करेंगे मां सरस्वती की पूजा तो एग्जाम में जरूर आएंगे अधिक नंबर !




श्री पंचमी या वसंत पंचमी बंगाल, बिहार तथा झारखण्ड का प्रमुख त्यौहार है इस दिन विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा की जाती है। वसंत पंचमी अर्थात माँ सरस्वती की पूजा माघ माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। तदानुसार, वर्ष 2017 की वसंत पंचमी बुधवार 1 फरवरी 2017 को मनाई जाएगी।  devotional maa sarswati puja vrat katha 

बसन्त पंचमी की कथा devotional maa sarswati puja vrat katha 

सृष्टि के प्रारम्भ में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश ने मनुष्य जाति का आवरण किया परन्तु त्रिदेव अपनी इस सृजन से संतुष्ट नही हुए। त्रिदेव को लगता था की निसंदेह कुछ कमी रह गई है जिसके कारण समस्त ब्रह्माण्ड में मौन व्याप्त रहता था। भगवान विष्णु तथा शिव से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमंडल से जल के साथ वेदों का उच्चारण करते हुए पृथ्वी पर छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उस स्थान पर कम्पन होने लगा। तत्पश्चात, उस स्थल पर स्थित वृक्ष से एक अद्भुत शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ। devotional maa sarswati puja vrat katha 

यह प्रादुर्भाव एक चतुर्भुजी सुन्दर सी स्त्री का था जिनके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ से तथास्तु मुद्रा को सम्बोधित कर रहा था। माँ के अन्य दोनों हाथो में पुस्तक एवम माला थी। त्रिदेव ने उनका अभिवादन किया तथा उनसे वीणा बजाने का अनुरोध किया। माँ सरस्वती ने त्रिदेव का अभिवादन स्वीकार करते हुए जैसे ही वीणा का मधुरनाद किया, तीनो लोको के समस्त जीव-जंतु तथा प्राणियों को वीणा की मधुरनाद प्राप्त हो गई। समस्त लोक वीणा के मधुरता में भाव-विभोर हो गए। माँ की वीणा की मधुरता से समस्त लोक में चंचलता व्याप्त हो गयी। इस कारण त्रिदेव ने माँ को सरस्वती के नाम से सम्बोधित किया। devotional maa sarswati puja vrat katha 

माँ सरस्वती के अन्य नाम devotional maa sarswati puja vrat katha 

माँ सरस्वती को माँ बागीश्वरी, माँ भगवती, माँ शारदा, माँ वीणावादनी तथा माँ वाग्यदेवी सहित अनेक नामों से जाना जाता है तथा उपासक इनके विभिन्न नामो से इनका उद्घोष और जयकारा लगाते है। संगीत की उतप्ति करने के कारण इन्हे संगीत की देवी भी कहा जाता है। वसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती का जनमोत्स्व मनाया जाता है। devotional maa sarswati puja vrat katha 

ऋग्वेद में माँ सरस्वती का उल्लेख किया गया है : प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। अर्थात माँ सरस्वती परम चेतना है तथा माँ हमारी बुद्धि, प्रज्ञा, मनोवृत्तियों आदि की संरक्षिका हैं। हममें जो चेतना और ज्ञान है उसका आधार माँ सरस्वती है इनकी स्वरूप और समृद्धि का वैभव अद्भुत है। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर माँ सरस्वती को वरदान दिया था की वसंत पंचमी के दिन आपका प्रादुर्भाव हुआ है। अतः इस दिन समस्त ब्रह्माण्ड में आपकी पूजा की जाएगी। अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें www.hindumythology.org