डॉक्टर हैं या यमराज




आजकल डॉक्टर व्यवहार जिस प्रकार से करते हैं वह नागवार गुजरता है। आज निजी अस्पतालों और क्लिनिकों में जैसा व्यवहार किया जाता है, उसमें कहीं से भी व्यवहारिकता नजर नहीं आता है। केवल और केवल पैसे बनाना उद्देश्य हो गया है। डॉक्टरों को पढ़ाई के बाद शपथ दिलाई जाती है कि वह मरिजों के साथ मानवीय व्यवहार करेंगे, लेकिन जैसे ही यह डॉक्टर प्रैक्टिस पर आते हैं तो इनका व्यवहार बदल जाता है। doctor hai ya yamraaj

डॉक्टरों का व्यवहार आज यमराज की तरह है,

अगर कोई ऑपरेशन होता है तो डॉक्टर पहले ही यह लिखवा लेते हैं कि किसी भी तरह की जिम्मेवारी क्लिनिक, अस्पताल और डॉक्टर की नहीं है। और यही डॉक्टर जहां ऑपरेशन नहीं करने की जरूरत होती है, वहां भी ऑपरेशन करने से बाज नहीं आते हैं। डॉक्टर मरिजों को डर दिखाकर उसका ऑपरेशन कर देते हैं। जबकि बिना ऑपरेशन के भी मरीज ठीक हो सकता है लेकिन उसे तो पैसे ऐंठने होते हैं। doctor hai ya yamraaj

डॉक्टर बेवजह टेस्ट लिखते हैं। डॉक्टर आंखें मूंदकर दस तरह की जांच लिख देते हैं। साफ है डॉक्टर मरीजों से ज्यादा दवाई कंपनियों और अपने कमीशन पर ध्यान रखते हैं। इसी चक्कर में आज डॉक्टर अपना प्रमाणित आधारित जांच छोड़कर केवल पैसे बनाने के उपाए पर ध्यान रखते हैं। doctor hai ya yamraaj

कौन कितने पानी में

आखिर यह सब आज के बाजारवाद डॉक्टरों पर ज्यादा हावी हो गया है जिसमें कहीं से भी मानवीयता नहीं दिखती है। जबकि डॉक्टरों को भगवान के बाद स्थान दिया गया है। आखिर क्या गारंटी है कि डॉक्टर ठीक से ऑपरेशन कर रहा है या नहीं। पूरा व्यवहार वैसा ही होता है जैसे किसी वस्तु के खरीदने का होता है। doctor hai ya yamraaj

हम कोई भी सामान खरीदते हैं तो उसकी गारंटी होता है डॉक्टरों का व्यवहार सामान की तरह ही है तो आखिर क्यों नहीं गारंटी। उपभोक्ता कोई भी वस्तु को लेकर उपभोक्ता अदालत जा सकता है तो क्यों नहीं डॉक्टरों को लेकर जाएं। डॉक्टरों का व्यवहार आज यमराज की तरह है, जिसपर सजगता आवश्यक हो गया है। doctor hai ya yamraaj