डोकलाम मामले में यूरोपीय संसद ने चीन को धमकाया





यूरोपीय संसद के वाइस प्रेजिडेंट ने चीन को दिखाया रास्ता तो भारत की कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन करने के लिए तारीफ की। जिससे चीन सकते में है। नरेंद्र मोदी सरकार ने चीन को उसी के अंदाज में जवाब दिया तो अब उसकी किरकीरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। दरअसल सिक्किम सीमा पर डोकलाम क्षेत्र में भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। जिसका अंदाजा चीन को भी नहीहं था। यूरोपीय संसद के वाइस प्रेजिडेंट अर्रसार्द चारनियेत्सकी ने अपने लेख ईपी टुडे में लिखा है कि चीन को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि भारत भूटान की सीमा की रक्षा के लिए इतने खुलकर समर्थन करने में आगे आएगा। गौरतलब है कि 16 जून को चीन की सेना ने डोकलाम क्षेत्र में सड़क बनाने की शुरुआत की। जिसके बाद भारत ने इसमें हस्तक्षेप किया और डोकलाम में भारतीय सेना और चीनी सेना में तनातनी के बाद दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। doklaam maamle mei europiye sansad ne chin ko dhamkaya

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यूरोपीय संसद के वाइस प्रेजिडेंट ने चीन के उस झूठ को भी खोलकर रख दिया है जिसमें पेइजिंग ने कहा था कि उसके शांतिपूर्ण उदय के कारण किसी देश को तकलीफ नहीं होगी। उन्होंने कहा कि चीन ने विदेश नीति में अतंरराष्ट्रीय नियमों को उल्लंघन किया है। चीन इन दिनों सीमा विवाद का बहाना बनाकर विवाद खड़ा कर रहा है। चारनियेत्सकी ने डोकलाम विवाद पर साफ लिखा है कि 16 जून को डोकला में सड़क बनाने का एकतरफा फैसला चीन की गलत विदेश नीति का हिस्सा है। भूटान ने अपने सही कूटनीति से चीन का विरोध किया लेकिन चीन को यह अंदाजा नहीं था कि भारत से ऐसे प्रतिक्रिया आएगी। यहां तक चीन ने भारत को 1962 तक की युद्ध की याद दिलाया तो भारत ने भी इसका जवाब दिया। उन्होंने लिखा है कि चीन को यह अच्छी तरह समझने की आवश्यकता है कि सैन्य ताकत और आर्थिक ताकत बढ़ने के साथ साथ किसी देश को अंतरराष्ट्रीय नियमों का भी पालन करने की जरूरत है। doklaam maamle mei europiye sansad ne chin ko dhamkaya