किसान आत्महत्या रातों-रात नहीं रुक सकती है : सुप्रीम कोर्ट





उच्चतम न्यायालय ने सरकार के इस दलील पर मुहर लगा दी है जिसमें कहा गया है कि किसानों के आत्महत्या का मसला रातों रात नहीं सुलझाया जा सकता है। सरकार लगातार प्रयास कर रही है कई कार्यक्रम शुरु किए हैं जिसके परिणाम आने में समय लगेगा।केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि सरकार ने किसानों के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं जिसमें फसल बीमा योजना सहति कई प्रभाव कारी योजना है जो किसानों को सशक्त बनाएगा लेकिन इसके परिणाम आने में थोड़ा समय लगेगा। किसानों की आत्महत्या मामले को इतनी जल्दी सुलझाया नहीं जा सकता है। farmers suicide issues

प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं





उच्चतम न्यायालय ने सरकार के द्वारा दी गई दलील को स्वीकार कर लिया। गौरतलब है कि गैर सरकारी संगठन सिजीजन्स रिसोर्स एंड एक्शन इनीशिएटिव ने एक जनहित याचिका दायर की थी जिसमें किसानों के आत्महत्या पर सरकार के उठाए गए कदम पर सवाल उठाए गए थे।

farmers suicide issues 

अनचाहे बाल हटाने के लिए ये उपाय नहीं की होगी आपने

यह याचिका गुजरात के संबंध में थे जिसे बाद में देशव्यापी कर दिया गया था। उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने इसकी सुनवाई की और इस याचिका पर सुनवाई 6 महीने के लिए स्थगित कर दिया। सरकार की ओर से अटार्नी जनरल ने जो दलीलें दी उसमें कहा गया कि किसान के लिए सरकार ने जो कार्यक्रम लागू किए हैं उसके नतीजे आने में समय लगेगा। farmers suicide issues 

न्यायालय ने शुरू में कहा कि किसानों की आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हो रही है परंतु जिस प्रकार से सरकार की ओर दलीलें दी गई जिसपर न्यायालय ने भी सहमति जाहिर कर दी। और सरकार को समय दे दिया। गौरतलब है कि देश में लगातार किसानों की आत्महत्याएं बढ़ती जा रही है। farmers suicide issues 

मोदी और योगी ने यादवों का जीना हराम कर दिया है !

पहले यह कोई एक दो राज्यों की समस्या थी लेकिन अब यह राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में तेजी से वारदात बढ़ रहे हैं। जिसके लिए सरकार लगातार कई कार्यक्रम की घोषणा की है। और किसानों की आमदनी दोगुनी हो इसके लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। farmers suicide issues 

loading…