एफसीआई हैंडलिंग मजदूरों का अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन




एफसीआई हैंडलिंग वर्कर्स के आह्वान पर भारतीय खाद्य निगम में कार्यरत लगभग 20 हजार श्रमिकों ने कल 19अगस्त को देश के विभिन्न हिस्सों से आकर दिल्ली स्थित भारतीय खाद्य निगम के प्रधान कार्यालय बाराखम्बा रोड और जंतर-मंतर पर सरकार एवम भारतीय खाद्य निगम के श्रम विरोधी नीतियों, नियमित श्रमिकों का ठेकाकरण, मजदूरों का शोषण, प्रताड़ित करने और एफसीआई के गोदामों को निजी कम्पनियों को बेच देने के विरुद्ध हुंकार रैली के रूप में आंदोलन किया। fci handling union workers movement 

हुंकार रैली आंदोलन में एफसीआई के सभी मजदुर यूनियन ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त कल ही देश के विभिन्न राज्यों में40 हजार मजदूरों ने गोदामों के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। अपने विरोध प्रदर्शन में मजदूर यूनियन ने अपनी मांगों को सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया।  fci handling union workers movement 

मजदूरों और मजदुर यूनियन के अनुसार सरकार देश में कार्यरत सभी गोदामों में काम कर रहे मजदूरों के साथ अवैधानिक व्यवहार कर रही है। जिस तरह से सरकार ने सभी फैसले मजदूरों के खिलाफ ली है। उससे साफ़ पता चलता है की सरकार मजदूरों का शोषण कर रही है। fci handling union workers movement 

ठेका प्रथा को खत्म किया जाए fci handling union workers movement 

सरकार ने जुलाई में एक नोटिफिकेशन जारी कर नियमित श्रमिकों का ठेकाकरण की बात की थी। इस नोटिफिकेशन के जरिए 6 जुलाई को 226 गोदामों के श्रम नियम में बदलाव कर ठेका पर लगाने की अनुमति दे दी। जबकि इन गोदामों में नियमति श्रमिक थे। fci handling union workers movement 

आपको बता दें की 1985 में केंद्रीय ठेका सलाहकार बोर्ड ने एफसीआई को ठेका करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। वही भारतीय खाद्य निगम ने भी कुल 460 गोदामों में से 275 गोदामों को ठेके पर लगा दिया है। जबकि 175 गोदामों को भी ठेके पर लगने की प्रयास जारी है।

आरटीआई से हुआ खुलासा केजीरवाल ने खुलवाए 72 नये शराब के ठेके

आंदोलन कर रहे मजदूरों ने ये भी आरोप लगाया की एफ सी आई में सैकड़ो रिक्तियों है जिसकी बहाली नहीं हो रही है। वही ठेकेदार अपने रिश्तेदारों को इस रिक्तियों पर जबरन बहाली करा रहे है। ऐसा सरकार जान कर रही है ताकि एफसीआई गोदामों से स्थायी श्रमिको को समाप्त कर इसे निजी कम्पनियों को सौंप दिया जाए। इस आंदोलन के जरिए मजदुर यूनियन ने जो मांगे रखी है वो निम्न है।  fci handling union workers movement 

रिटायर श्रमिकों की ट्रीटमेंट राशि 10 लाख किया जाए fci handling union workers movement 

* ठेका प्रथा को खत्म किया जाए।
*डीपीएस और एनडब्लूएनपी सिस्टम को अपग्रेड किया जाए और श्रमिकों को समस्त सुविधाएँ दिया जाएँ।
*पुलिंग व्यवस्था समाप्त किया जाए।
*बोनस 2014 से अब तक का नए रेट से दिया जाए।
*एफ सी आई की तरह पेंशन स्कीम सभी श्रमिकों को दिया जाए।
*मुजफ्फरनगर के 95 श्रमिकों का शिफ्टिंग किसी अन्य रीजन में किया जाएं।
*बरेली के कैजुअल श्रमिकों को डीपीएस का दर्जा दिया जाए।

*रिटायर श्रमिकों की ट्रीटमेंट राशि 10 लाख किया जाए।
*मृत आश्रितों के श्रमिकों को अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति दी जाए।
*विभागीय श्रमिकों के एलॉयन्स की राशि बढ़ाया जाए।
*ठेका प्रथा को बंद करके वंहा पर श्रमिकों को नियमित किया जाए।
*श्रमिको के अवैध स्थांतरण समाप्त किया जाए।
*श्रम कानून नियम अधिकार को नहीं छीना जाए।
*श्रमिकों का नियोजन विभागीय श्रमिक में किया जाए।
*रिक्त स्थान पर श्रमिकों की बहाली की जाए।
*श्रमिकों की रोजी-रोटी पर राजनिति बन्द की जाए।

मजदुर यूनियन की मांग सरकार मानेगी अथवा नामंजूर कर देगी। ये तो आने वाले दिनों में पता चलेगा लेकिन एक बात तो तय है की जो मुहीम देश के मजदूरो ने छेड़ी है वो आज न कल सरकार को जरूर माननी पड़ेगी और मजदूरो को उनका हक, अधिकार और सम्मान पुनः वापस दिया जाएगा। fci handling union workers movement 
( प्रवीण कुमार )