गौ माता की रक्षा करने वाले देश की महिलाओं की कब रक्षा करोगे !




मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से देश दो खेमे में बंट गया है। एक तरफ देशप्रेमी है तो दूसरी तरफ देशद्रोही है। ऐसे में टकराव और मनमुटाव होना लाजमी है। जोकि अक्सर होता रहता है। चाहे वो कन्हैया कुमार का देशद्रोही भाषण हो, या फिर राजनेताओं द्वारा उनको बढ़वा देना हो। सभी जगहों पर दोनों खेमे के बीच मनमुटाव देखा गया है। gau seva vs women seva

ताजा मामला जुनैद खान की मौत का है। जंहा जुनैद की मौत के बाद राजनेताओं ने इसे राजनैतिक रूप दे दिया और देश भर में विरोध प्रदर्शन किया। वही कश्मीर में अलगाववादी नेता मीर वाईज़ की सुरक्षा में तैनात डी सी पी अयूब खान को जब भीड़ ने पीट-पीट कर जान से मार दिया तो ये नेता कश्मीर में अलगाववादी और पत्थरबाजों के विरोध में कश्मीर नहीं गये, न ही इन्होने अयूब खान के हत्यारों का विरोध किया। ऐसे में इन राजनेताओं की मानसिकता का पता चलता है। gau seva vs women seva

विदित हो कि अख़लाक़ की मौत के बाद देश भर के मशहूर साहित्यकारों, कलाकारों ने जो अवार्ड वापसी की थी वे भी अयूब खान की मौत के बाद कुछ नहीं बोले। इस तरह की राजनीति से न केवल देश को भारी नुक्सान हो रहा है बल्कि युवा वर्ग का भविष्य भी अंधकार की ओर अग्रसर है। gau seva vs women seva

gau seva vs women seva  नारी प्रधान देश में नारी की ऐसी दशा क्यों है

गौरतलब है कि पिछले वर्ष नोटबंदी से पूर्व पीएम मोदी ने उनलोगों की कड़ी निंदा की थी जो देश सेवा और गौ सेवा की आड़ में समाज को तोड़ने की कोशिस पर तुले है। यदि बात की जाये देश सेवा की तो वर्तमान परिवेश में कश्मीर ही एक ऐसा प्रमुख मुद्दा है जंहा पर देश भक्ति झलकती है। इसके अतिरिक्त बंगाल, राजस्थान, गुजरात, असम, सिक्किम आदि राज्यों में भी देश की सीमा लगती है पर वहा पर स्थिति नियंत्रण में है।

वही गौ सेवा की बात की जाये तो इससे दो समुदाय की आस्था जुडी है। हिन्दू वर्ग गौ को माता का दर्जा देते है। वही मुस्लिम वर्ग इसे प्रमुख व्यंजन मानते है। ऐसे में टकराव की प्रबल संभावना बनी रहती है। हालांकि, सनातन धर्म सबसे प्राचीन धर्म है और इस धर्म के लोग गौ पूजा, गौ सेवा, गौ रक्षा को अपना धर्म मानते है। ऐसे में हिन्दू वर्ग किसी भी कीमत पर गौ वध की इजाजत नहीं देगा।

मोदी सरकार के गठन के बाद हिन्दू संगठन आरएसएस ने मुस्लिम वर्ग के गौ वध हत्या पर नकेल कसी और आज देश के कई राज्यों में गौ वध पर पूर्ण प्रतिबंध है। जिससे दो समुदायों के बीच आपसी रंजिश बढ़ गयी है। कई वर्ग और राजेनता गौ सेवा की आड़ में हिन्दू और मुस्लिम के लोगों को भड़का रहे है। जिससे देश में दंगे जैसा माहौल है।

ऐसे में सरकार और जनता दोनों का कर्तव्य है कि अफवाहों पर ध्यान न दे और देश की विकास और उन्नति में भागीदार बने। हां, एक सवाल उन गौ सेवकों से जरूर देश की जनता करना चाहेगी कि गौ सेवा तो आप कर रहे है पर जननी सेवा कब करोगे ? कब तक नारियों पर अत्याचार और हमले होते रहेंगे, कब तक नारी, बेबस और बेचारी बनी रहेगी, कब देश में नारियां स्वतंत्र होकर जी पाएगी ?

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देश में अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। रोजाना महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हो रहा है। महिलाएं बाहर निकलने से डरती है। ऐसे में ये जिम्मेवारी किसकी बनती है कि वे महिलाओं की रक्षा करे। यदि देश सेवा, गौ सेवा धर्म है तो नारी सेवा क्यों नहीं धर्म है। नारी प्रधान देश में नारी की ऐसी दशा क्यों है। इसका जबाब हमें ढूँढना चाहिए।
( प्रवीण कुमार )

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