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दार्लिजिंग में एक बार जल उठा है और नब्बे की दशक को याद करा रहा है। यहां फिर से अलग राज्य की मांग उठ रही है। गोरखालैंड नाम से अलग राज्य बनाने की मांग करीब 110 साल पुरानी है। दार्जिलिंग लगभग एक हफ्ते से हिंसा की आग में झुलस रहा है। जहां लगातार गोरखालैंड की मांग हो रही है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के मुखिया बिमल गुरुंग इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। gorkha movement new state demand 

गोरखालैंड की मांग ताजा हुई है

इस आंदोलन को ताजा चिंगारी मिली है जिसमें दार्जिलिंग के स्कूलों में बंगाली भाषा पढ़ाने के ममता सरकार के ऐलान के बाद हुई। गोरखा जन मुक्ति मोर्चा ने राज्य की मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अनिश्चितकाल की हड़ताल का आह्वान किया है। जिसके बाद लगातार दार्जिलिंग की स्थिति तनाव पूर्ण है। gorkha movement new state demand 

प. बंगाल सरकार लगातार यह कह रही है कि कानून तोड़ने वाले को दंड दिया जाएगा। यहां तक सरकारी कर्मचारी को कार्यालय आना अनिवार्य कर दिया गया है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने अलग राज्य की मांग तेज कर दी है। इसके मुखिया बिमल गुरंग के यहां छापा भी मारा गया जिसके विरोध में दार्जिलिंग में अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान कर दिया है। gorkha movement new state demand 

जनमुक्ति मोर्चा ने कहा है कि विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा

केंद्र सरकार जीजेएम और प्रदेश सरकार के बीच बैठक कराने पर विचार कर रही है जिससे की यहां शांति स्थापित किया जाए। गौरतलब है कि राजीव गांधी के प्रधानमंत्री काल में भी गोरखालैंड की पूरजोर मांग उठी थी जिसको लेकर काफी दिनों तक आंदोलन चला। जिसके बाद सुभाष घिसिंग के साथ समझौते हुए और परिषद बनाया गया तब जाकर दार्जिलिंग में शांति स्थापित हुई थी। gorkha movement new state demand 

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अब एक बार फिर से गोरखालैंड की मांग ताजा हुई है तो इसमें प. बंगाल सरकार ने जो भाषा का अनिवार्यता सौंपा है वह तत्कालिक कारण बना है। पिछले दस दिनों में कई दुर्घटनाएं हुई है लेकिन अब भी जनमुक्ति मोर्चा ने कहा है कि विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। जीजेएम के प्रमुख बिमल गुरंग ने अपने आप को हिल्स के मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया है। gorkha movement new state demand