तीन तलाक के बाद महिलाओं का खतना पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए : मुस्लिम महिलाएं




सरकार लगातार इस कोशिश में है कि किसी भी तरह से सामाजिक कुरितियों को समाप्त किया जाए। जिसके तहत तीन तलाक के बाद महिलाओं में खतना को खत्म करने के लिए प्रयास कर रही है। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार के चार मंत्रालयों से महिलाओँ में खतना पर राय मांगी है। govt ban women khatana 

पर्सनल लॉ बोर्ड

गौरतलब है कि अभी उच्चतम न्यायालय अभी तीन तलाक पर लगातार सुनवाई कर रही है। मुसलमानों के एक बोहरा समुदाय में यह काफी प्रचलित है। देश में करीब बीस लाख बोहरा हैं। चार प्रकार के खतना किए जाते हैं। जिसमें भारत में दो तरह के खतना होते हैं जिसमें महिलाएं को भी कष्ट सहना पड़ता है। govt ban women khatana 

देश में दाऊदी बोहरा समेत अन्य बोहरा समुदाय में खतना का प्रचलन है। सरकार के पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है कि कितने महिलाओं का खतना हुआ है। करीब 90 फीसदी महिलाओं को खतना किया जाता है। जिसमें महिलाओं को काफी दुष्परिणाम का सामना करना पड़ता है। महिलाओँ को लंबे समय तक कष्ट होता है। महिलाओँ की मृत्यु तक हो जाती है। महिलाओं को खतने से लैंगिक आधार पर काफी कष्ट होता है जिसके लिए याचिका दायर की गई है। govt ban women khatana 

संवैधानिक पीठ

गौरतलब है कि कई राष्ट्रों में इस तरह के खतने पर रोक है। जिसमें आस्ट्रेलिया और अमेरिका शामिल है। भारत ने बीस लाख बोहरा समुदाय के लोग हैं जिन्हें इस तरह के सामाजिक कुरितियों का सामना करना पड़ रहा है। उच्चतम न्यायालय ने इस तरह की कुरितियों को समाप्त करने के लिए सरकार से राय मांगी है। govt ban women khatana 

अल्लाह ने हूर( औरत) को केवल निकाह, हलाला और तीन तलाक के लिए बनाया है : मुस्लिम पर्सनल लॉ

जिसमें चार मंत्रालयों को रिपोर्ट देने को कहा है जिससे की इसपर उच्चतम न्यायालय अपनी जजमेंट दे सके। अभी देश में तीन तलाक पर लगातार सुनवाई हो रही है जिसमें पर्सनल लॉ बोर्ड सहित पक्ष एवं विपक्ष दोनों की राय को सुनी जा रही है। इसके लिए संवैधानिक पीठ बनाई गई है। govt ban women khatana