गोवर्धन पूजा पर ऐसे करें भगवान् कृष्ण की पूजा तो बनेंगे सारे बिगड़े काम




हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष शुक्रवार 20 अक्टूबर 2017 को गोवर्धन पूजा मनाई जाएगी। गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन की जाती है। हिन्दू धर्म में इस पूजा को बड़े ही हर्षोउल्लाश के साथ मनाते है। धार्मिक मान्यता अनुसार इस पूजा से मानवजाति में प्रकृति और प्राकृतिक साधनों के प्रति आदर और सत्कार की भावना पैदा होती है। gowardhan puja vrat

गोवर्धन पूजा की कथा gowardhan puja vrat

धार्मिक कथा अनुसार के द्वापर युग में सभी लोग अच्छी जलवायु और उपरोक्त समय पर बारिश होने के लिए इंद्र देव की पूजा करते थे। एक बार बाल श्री कृष्ण जी ने इस पूजा के बारे में नन्द जी से पूछा तो उन्होंने बताया कि यह पूजा इंद्र देव के अभिवादन के लिए की जाती है। तब बाल कृष्ण जी ने गांववासी को बताया कि हमारी जलवायु के लिए इंद्र देव की नहीं अपितु गोवर्धन पर्वत का अभिवादन करना चाहिए। सभी को बाल श्री कृष्ण जी की बातें अच्छी लगी। gowardhan puja vrat

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तभी से सभी ने इंद्र देव की बदले में गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। इस बात से इंद्र देव अति क्रोधित हो गए। क्रोधित इंद्र देव ने गोकुल में आंधी-तूफ़ान और वर्ष से त्राहि मचा दी। जिससे सभी का जीवन खतरे में था। विपरीत स्थिति में बाल श्री कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को अपने हाथों की छोटी सी उंगली पर उठा लिया। जिससे सभी लोगों को संरक्षण प्रदान किया। gowardhan puja vrat

 

सात दिनों तक सतत वर्षा हुई और बाल श्री कृष्ण जी ने सातों दिन तक अपनी छोटी ऊँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाये रखा। तत्पश्चात इंद्र देव को अपनी गलती का अहसास हुआ कि जिस जलवायु को वो खुद के द्वारा रचित समझते है। वो कर्म बंधन से बंधा है और यह उनका कर्तव्य है। इसका अभिमान करना अनुचित है। उस दिन से ही गोवर्धन पूजा का प्रारम्भ हुआ। अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें www.hindumythology.org



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