जानिए हिम के हीरो हनुमान थापा की जीवनी




एक वर्ष पूर्व फरवरी के महीने में भारी बर्फवारी से घाटी में आम-जीवन पूरी तरह से ठप हो गया था लेकिन इसके बाबजूद सियाचिन के ग्लेशियर पर सेना के जवान अपनी कर्तव्यों को बखूबी निभा रहे थे। अचानक सियाचिन पर भारी बर्फवारी से हिमस्खलन होने लगा। इस हिमस्खलन में सेना का एक कैंप भी चपेट में आ गया। जानिए हिम के हीरो हनुमान थापा की जीवनी hanuman thapa brave soldiers story 

ये कैंप पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा के पास 19,600 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित था हिमस्खलन की चपेट में जूनियर कमीशंड अधिकारी और मद्रास रेजिमेंट रैंक के आठ अन्य सहित कुल नौ सैनिकों की मौत हो गई थी। बर्फ की २५ फुट मोटी बर्फ के नीचे सेना के सभी जवान दब गए। hanuman thapa brave soldiers story 

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सभी सैनिकों की तो मौत हो गयी लेकिन हनुमान थापा 25 फुट मोटी बर्फ के नीचे दफ़न होने के बाद भी जीवित रहा। खोजी अभियान में 8 सैनिको को ढूंढ निकाला गया लेकिन हनुमान थापा को ढूंढने में सेना को सफलता हासिल नहीं हुई। सेना ने हनुमान थापा की खोज में सेना के प्रशिक्षित डॉग को लगाया। 6 दिन बाद हनुमान थापा को सेना ने ढूंढ निकाला। जानिए हिम के हीरो हनुमान थापा की जीवनी hanuman thapa brave soldiers story 

हनुमान थापा को नई दिल्ली लाया गया जंहा सेना के अस्पताल में उनका उपचार होने लगा। इस बीच पीएम मोदी भी हनुमान थापा से मिलने अस्पताल पहुंचे लेकिन अत्यधिक दबाब के कारण हनुमान थापा का रक्त संचरण बन्द पड़ गया था। दो दिन तक हनुमान थापा मौत से लड़ते रहे लेकिन अंततः हनुमान थापा ने सदा के लिए अपनी आँखें मूंद ली। हनुमान थापा की शहादत से पूरा देश शोक में डूब गया। हालांकि, हनुमान थापा आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी शहादत को सदा याद रखा जाएगा। hanuman thapa brave soldiers story