एक गांव ऐसा भी जंहा दशहरे के दिन होती है रावण की लात घुसो से पिटाई




छत्तीगसढ़ के कोण्डागांव जिले में एक ऐसा गांव है जहां वर्षों से अनोखी परंपरा चली आ रही है। रावण को मारने को लेकर जितना उत्साह इस इलाके में रहता है वह शायद ही कहीं और होता हो। एेसा इसलिए क्योंकि यहां विजयादशमी पर बुराई के प्रतीक रावण को जलाया नहीं जाता बल्कि हर साल मिट्टी का पुतला बनाकर लात-घूसों से मार कर उसे गिरा दिया जाता है। happy dussehra 2016 

यह फरसगांव ब्लॉक छोटे डोंगर से पांच किमी दूर ग्राम भूमका में निवासरत ग्रामीणों की यह एक अनोखी परंपरा है। जो पिछले 73 सालों से चली आ रही है। जिसे देखने के लिए दूर-दराज से भी ग्रामीण आते हैं और इसी तरह से गांव में भी विजयादशमी मनाया जाता है। happy dussehra 2016 

रामनाथ बनता है रावण

पिछले 45 सालों से रावण की भूमिका निभाने वाले रामनाथ ने बताया कि यहां रावण का वध इसलिए नहीं किया जाता, क्योंकि इसे जलाने से वह आधे घंटे के अंदर ही जलकर नष्ट होता जाता है जिससे उसके अहंकार का अच्छी तरह से नाश नहीं हो पाता। happy dussehra 2016 

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इसलिए यहां रामलीला का पाठ करने के बाद बनाए गए रावण के पुतले को लात-घूसों से मार कर उसकी बुराईयों को हमेशा-हमेशा के लिए नष्ट कर दिया जाता है। रावण के पुतले के नाभि में एक कलस में लाल रंगका घोल होता है। जिसे लात घुसे मार कर सारे ग्रामीण विजय तिलक कर विजयादशमी मानते है । happy dussehra 2016 

रामलीला देखने हजारों की संख्या में पहुंचते हैं लोग

यहां विजयादशमी पर ग्रामीणों द्वारा रामलीला का आयोजन किया जाता है। जिसे देखने के लिए यहां के लोगों अलावा आस-पास के गांवों से भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं और राम की अच्छाईयों को आत्मसात कर अपने अंदर की बुराई का त्याग कर यहां से लौटते हैं happy dussehra 2016 

( कैमरामैन रोशन पाल के साथ सुनील यादव की रिपोर्ट )