वर्षों बाद बना होली पर ऐसा संयोग, जाने कब करें पूजा और कब मनाएं होली !




वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन होली मनाई जाती है। तदानुसार, इस वर्ष सोमवार 13 मार्च 2017 को होली मनाई जाएगी। होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। एक ओर जंहा होली सामाजिक एवं धार्मिक त्यौहार है, वही यह रंगों का भी त्यौहार है। बच्चे, बूढ़े, नर-नारी सभी इस त्यौहार को उत्साह और उमंग से मनाते है। होली धार्मिक सद्भाव की सीख देती है। इस अवसर पर भारत के कई हिस्सों में लकड़ियों तथा कंडों आदि का ढेर लगाकर होलिकापूजन किया जाता है। पूजा सम्पन्न होने के पश्चात जमा की गयी लकड़ी और कड़ों में आग लगायी जाती है। happy holi 2017

होली की कथा happy holi 2017

धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली मनाई जाती है । होली की कथा से कई प्राचीन तथ्य जुड़े है। जिनमें सबसे प्रसिद्ध कथा होलिका दहन की है। वेदों, पुराणों एवं शास्त्रानुसार प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। जो अपने बल के अंहकार पर स्वंय को ईश्वर मानने लगा था। उस क्रूर राक्षस ने अपने सम्राज्य में ईश्वर के स्मरण मात्र पर पाबन्दी लगा दी थी। happy holi 2017

जिससे चारों तरफ त्राहिमाम मच गया। उस समय लोगों ने भगवान से प्रार्थना की। प्रभु, हमें हिरण्यकशिपु के पापों से बचाएं। तत्पश्चात, हिरण्यकशिपु के घर पर सन्तान प्रह्लाद का जन्म हुआ जो भगवान् श्री हरि विष्णु जी का परम भक्त था। प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने उसे नाना प्रकार के कठोर दंड दिए, किन्तु प्रह्लाद ने ईश्वर भक्ति का मार्ग न छोड़ा।  happy holi 2017

हिरण्यकशिपु ने तब होलिका को आदेश दिया कि वो प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठे। क्योंकि हिरण्यकशिपु को ये पता था कि होलिका आग में जल नहीं सकती है। शास्त्रों में निहित है कि होलिका को आग में जलने पर भस्म न होने का वरदान प्राप्त था किंतु जब होलिका अपनी गोद में प्रह्लाद को लेकर आग में बैठी तो होलिका आग में जलकर भस्म हो गयी किन्तु प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ। happy holi 2017

ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होली मनाई जाती है। प्रहलाद का शाब्दिक अर्थ आनंद होता है। होली के दिन वैर और उत्पीडन की प्रतीक होलिका जलती है। जबकि जगत में प्रेम तथा उल्लास का आनंद रहता है। अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें www.hindumythology.org