सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार का गुलाम सेवक है : कर्णन


लुकाछिपी खेल रहे है कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सीएस कर्णन ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि उनकी सजा को रद्द कर दी जाए। जिसके तहत उन्हें छह साल की सजा सुनाई गई है। राष्ट्रपति कार्यालय ने ऐसी कोई य़ाचिका प्राप्त होने की खबर का इंकार किया है। indian law helpless

पुलिस इन्हें गिरफ्तारी के लिए खोज रही है।

कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सीएस कर्णन ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उन्हें मिली सजा को रद्द करने का गुहार लगाई है। हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय में ऐसी कोई याचिका नहीं आई है। जिसमें इनकी सजा को खत्म करने का आग्रह किया गया हो। गौरतलब है कि सीएस कर्णन पर न्यायालय की अवमानना का मामला चल रहा है जिसके लिए मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें छह महीने की सजा सुनाई थी। indian law helpless

न्यायाधीश सीएस कर्णन ने साफ तौर पर न्यायाधीशों पर आरोप जड़े थे जिसके बाद इनकी मेडिकल जांच के लिए कहा गया था। उसके बाद सजा सुनाई गई है। लेकिन जब से सजा सुनाई गई है वे पुलिस के गिरफ्त में नहीं आए हैं। सीएस कर्णन के वकीलों ने संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत आने वाला एक मेमोरेंडम जेल के जरिए राष्ट्रपति को भेजा था।  indian law helpless
जिसमें सजा रद्द करने को कहा था।

सीएस कर्णन को सजा सुनाई गई है

इस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति को अधिकार होता है कि अगर किसी भी तरह के अपराध में दोषी पाए गए शख्स को राष्ट्रपति उसको मिली सजा को रद्द कर सकते हैं। गौरतलब है कि इसके पहले जस्टिस कर्णन ने सजा को पुनर्विचार के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका डाली थी जिसपर मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई से इंकार कर दिया था। indian law helpless

जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट से बगावत पड़ी महंगी हुई छह महीने की जेल

जिस प्रकार से सीएस कर्णन को सजा सुनाई गई है यह स्वतंत्रता के बाद के इतिहास का पहला मसला है। जिसमें पद पर रहते हुए कर्णन को सजा सुनाई गई है और पुलिस इन्हें गिरफ्तारी के लिए खोज रही है। indian law helpless