अब धुप से चलेगी ट्रैन





सौर ऊर्जा वह उर्जा है जो सीधे सूर्य से प्राप्त की जाती है। सौर ऊर्जा ही मौसम एवं जलवायु का परिवर्तन करती है। यहीं धरती पर सभी प्रकार के जीवन (पेड़-पौधे और जीव-जन्तु) का सहारा है। वैसे तो सौर उर्जा के विविध प्रकार से प्रयोग किया जाता है, किन्तु सूर्य की उर्जा को विद्युत उर्जा में बदलने को ही मुख्य रूप से सौर उर्जा के रूप में जाना जाता है। सूर्य की उर्जा को दो प्रकार से विदुत उर्जा में बदला जा सकता है। पहला प्रकाश-विद्युत सेल की सहायता से और दूसरा किसी तरल पदार्थ को सूर्य की उष्मा से गर्म करने के बाद इससे विद्युत जनित्र चलाकर।दुनिया में पहली बार ऐसा हो रहा है कि ट्रेन सौर ऊर्जा के माध्यम से चलाया जा रहा है। परंपरागत ऊर्जा की बचत के लिए उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से जहां प्रदूषण कम होगा वहीं रेलवे को खर्च में भी बचत होगी। indian railways first solar powered train

2020 तक भारत विश्व का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क देश बन जाएगा : मोदी सरकार





देश की पहली सौर ऊर्जा डीजल इलेक्टिक मल्टिपल यूनिट ट्रेन को दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन से रवाना किया गया। खास बात यह है कि इस ट्रेन की कुल आठ बोगियों में सोलह सोलर पैनल सेट किए गए हैं। इसके हर पैनल में 300 वॉट बिजली उत्पादन होगा। इससे हर वर्ष 21,000 लीटर डीजल की बचत होगी। रेलवे को इससे काफी लाभ भी होने वाला है क्योंकि इससे रेलवे को हर वर्ष दो लाख रुपया बचेगा। सरकार इस तरह की 50 अन्य कोचों में ऐसे ही सोलर पैनल्स लगाने की योजना पर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री की खास योजना मेक इन इंडिया अभियान के तहत बने इन सोलर पैनल्स की लागत 54 लाख रुपए आई है। यह दुनिया में अपने आप में एकदम अलग है। सोलर पैनल की वजह से प्रति कोच के हिसाब से हर वर्ष नौ टन तक कार्बन डाइऑक्साइड कम उत्सर्जित होगा। पर्यावरण संरक्षण के हिसाब से यह देश की बड़ी उपलब्धि है। सोलर पावर सिस्टम से ट्रेन करीब 48 घंटे तक आराम से चल सकती है, उसके बाद ही ओएचई पावर के लिए स्विच करने की जरूरत होगी। सोलर पावर के प्रयोग से पच्चीस वर्षों में प्रति ट्रेन 1,350 टन कार्बन डाइआक्साइड का उत्सजर्न कम होगा। रेलवे की इस परियोजना से हर वर्ष जहां 700 करोड़ रुपए की बचत होगी वहीं हर ट्रेन में 5.25 लाख लीटर डीजल बचाया जा सकता है। गौरतलब है कि इस वर्ष के रेल बजट में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने ऐलान किया था कि रेलवे सौर ऊर्जा से अगले पांच वर्षों में एक हजार मेगावॉट बिजली पैदा करेगा।