मोदी जी, पाकिस्तान के लिए अफगानिस्तान ही काफी है




वरिष्ठ संपादक नीरज कुमार, indo-afghan relationship  
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कल बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान नहीं चाहता है कि भारत और अफगानिस्तान की दोस्ती बढ़ें। आप कह सकते है की पाकिस्तान इसके विरोध में है और इसके लिए वो सभी हथकंडे अपना रहा है। उन्होंने मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच रिश्ते को एक नयी दिशा देने में माननीय मोदी का महत्वपूर्ण योगदान है। indo-afghan relationship  

आज अफगानिस्तान के विकास में मोदी हरसंभव सहायता कर रहे है जो सम्मानीय है। मोदी का अफगानिस्तान यात्रा दोनों देशों के लिए अति महत्वपूर्ण है। मैं अफगानी सरकार से गुजारिश करूंगा की देश के विकास के लिए मोदी का पूर्णरूपेण सहयोग करें क्योंकि देश नफरत से नहीं प्यार से बढ़ता है। जो आज मोदी कर रहे है उसे पुरे विश्व को करना चाहिए। indo-afghan relationship  

मोदी हरसंभव सहायता कर रहे है जो सम्मानीय है indo-afghan relationship  

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान नहीं चाहता है कि भारत की पहुँच मध्य एशिया तक बने और न ही अफगानिस्तान का भारत से पारस्परिक संबंध सुधरें किन्तु पाकिस्तान को ये समझने की जरुरत है की आज पूरा विश्व एक तरफ है और सभी राज्यों पर उपनिवेशवाद थोपना चाह रहा है।

ऐसे में पाकिस्तान को चाहिए की भारत के साथ मिलकर एशिया में शांति स्थापित करें। भारत का इतिहास रहा है की वो शांति प्रिय देश है। ऐसे में पाकिस्तान न केवल एशिया में शांति स्थापित करने के लिए भारत, अफगानिस्तान और ईरान का सहयोग करें बल्कि पाकिस्तान में फैली अराजकता और आतंकवाद को कम करने के लिए भी पडोसी मुल्क से मदद लें। indo-afghan relationship

मोदी आधुनिक विश्व के शांतिदूत है : चीनी राष्ट्रपति

हामिद करजई ने कहा की आज की तारीख में पाकिस्तान चरमपंथी और दहशतगर्दो के लिए पनाहगाह है, जिसे पाकिस्तान को तुरंत बंद करना चाहिए। मोदी ने भारत को पुरे विश्व के साथ जोड़ा है और भारत को विकास की मार्ग पर ले जा रहा है। वही पाकिस्तान अब भी अपनी रूढ़िवादी विचारधारा को अपनाए हुए है। indo-afghan relationship  

उन्होंने कहा कि भारत आज भी विकासशील देश है किन्तु मोदी अफगानिस्तान में स्वास्थ सम्बन्धी क्षेत्र और इंफ्रास्स्ट्रक्चर आदि को स्थापित करने में आर्थिक सहयोग कर रहा है। यदि पाकिस्तान समय के साथ अपने विदेश नीति में बदलाव नहीं कर पाया तो वो वक्त बहुत जल्द आएगा जब पाकिस्तान एशिया प्रान्त में अलग-थलग पड़ जाएगा क्योंकि जिस जमी के जरिये वो आज पडोसी मुल्क पर हमला कर रहा है वो उसी का कब्रगाह बन जाएगा। indo-afghan relationship