जानिए कांग्रेस की कमजोरी का राज




पिछले कुछ वर्षों से आरएसएस के बढ़ते जनाधार जिसे आप लोकप्रियता भी कह सकते है इस पर आजकल पुरे देश में अलग अलग तरह से चर्चा हो रही है कुछ लोग इसे आरएसएस द्वारा किये जा रहे जनसेवा का परिणाम बता रहे हैं तो कुछ लोगों का मानना है कि इससे सेकुलरिज्म को नुकसान होगा वैसे दोनों ही धरा एक बात जरूर मान रहे हैं कि आरएसएस काफी तेजी से मजबूत हो रही है। हाँ इसका परिणाम दोनों अपने अपने सुविधा अनुसार बता रहे है। janiye congres ki kamjori ka raaz

यहाँ एक बात स्वीकार करने में शायद किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी कि इस देश में जितने भी संगठन या राजनैतिक पार्टी हुए उन सभी के जन्मदाता या यूँ कहें की संस्थापक कही न कहीं कभी न कभी कांग्रेस से जुड़े हुए थे। जैसे आरएसएस को ही ले लीजिये डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार जी भी पहले कोंग्रेसी ही तो थे उन्होंने उस वक्त कांग्रेस में कुछ न कुछ अलोकतांत्रिक या जनविरोधी विचारों का विरोध किया होगा या मांग की होगी जिसे कांग्रेस की हठ धर्मिता के कारण पूरा नहीं किया गया होगा जिससे आहात होकर उन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा के लोगों को जोड़ कर आरएसएस की स्थापना की और आज आप सबके सामने है। janiye congres ki kamjori ka raaz

ये तो हुआ सबसे पुरानी बात, अब आ जाईए आजादी के बाद की घटनाओं पर डॉ भीम रॉव आंबेडकर जी को जब लगा की कांग्रेस में कुछ न कुछ अलोकतांत्रिक या जनविरोधी विचारधारा वाले लोग दलितों के हितों की अनदेखी कर रहे हैं तो वे कांग्रेस से अलग हो गए और आज आप के सामने है कांग्रेस किस प्रकार दलितों का वोट दुबारा से अपने पक्ष में करने के लिए छोटे छोटे अम्बेडकरवादी पार्टियों के पीछे घूमती नजर आ रही है। janiye congres ki kamjori ka raaz

कांग्रेस 5 या दश साल बाद सत्ता में आ जाती है

थोड़ा और आगे आकर देखें तो कोंग्रेसियों ने 70 के दशक में इतने अलोकतांत्रिक या जनविरोधी कार्य किये कि देश में आपातकाल लागु कर दिया और उसी अलोकतांत्रिक या जनविरोधी सोच के कारण मुरारजी देशाई सहित कई समाजवादी नेता कांग्रेस को छोड़ कर अलग धरा या पार्टी बना लिए और आज उनके ही लर- झोर अर्थात मुलायम सिंह, लालू, देवेगौड़ा, आदि के पीछे कांग्रेस ऐसे घूमती है जैसे उनके सामने कांग्रेस का कोई जनाधार ही न हो जबकि ये सभी कभी न कभी इसी कांग्रेस में थे और उनके अलोकतांत्रिक या जनविरोधी नीतियों से तंग आकर अपनी अलग धरा बनायीं और वे कुछ हद तक सफल भी हुए तभी तो कांग्रेस आज उनके पीछे जूनियर की भूमिका निभाने को भी तैयार है। janiye congres ki kamjori ka raaz

एक बात और आप सोच रहे होंगे कि मैंने बीपी सिंह और चंद्रशेखर सिंह का नाम तो लिया ही नहीं, तो उसका कारण ये है कि वे फ्लॉप (असफल) नेता हुए क्योंकि उनकी पार्टी का आज कोई जनाधार नहीं है और मैं आज उन लोगों की बात कर रहा हूँ जो कांग्रेस से निकल कर सफल हुए हैं तो ऐसी क्या कमी है कांग्रेस के विचारधारा में जो लोग उसे छोड़ कर जब जनता के पास जाते हैं तो जनता उन्हें सर आँखों पर बिठाती है ये बात और है कि इनमें से अधिकांश अपना उल्लू सीधा करने के लिए समय समय पर पिछले दरवाजे से कांग्रेस को सपोर्ट कर देते हैं। janiye congres ki kamjori ka raaz

कांग्रेस लालच के कारण डर रही है

अब शायद आप सोच रहे होंगे कि मैं इतनी सारी बातें आज ही क्यों बता रहा हूँ। तो दरअसल आज कांग्रेस में दो अलग अलग बदलाव (परिवर्तन) वाला खबर देखा एक तो वाकई में प्रोत्साहित करने वाला था लेकिन दूसरा लालच भरा गढ्ढा खोदने जैसे था जिसमें कल को फिर से कांग्रेस ही गिरने वाली है। janiye congres ki kamjori ka raaz

पहला तो ये था कि आरएसएस से मुकाबला करने के लिए कांग्रेस अपने पुराने संगठन सेवा दल को मजबूत बनाएगी और जगह जगह लोगो को जोड़ने हेतु कार्यकम करेगी । अच्छी सोच है उसके लिये कोशिश भी करनी चाहिए।

लेकिन दूसरी खबर एमपी से ज्योतिरादित्य सिंधिया के तरफ से आयी की कांग्रेस मध्यप्रदेश में भी जूनियर रोल निभाने के लिए तैयार है। यहाँ तो ये पहले ही हार मान बैठे है। भाई आपके बुजुर्गों की गलती ने कर्नाटक दिया। जहाँ आप अपने से आधे से भी कम वाले के साथ सत्ता के लालच में जूनियर बने बैठे है। और एमपी जहाँ किसी तीसरे दल का कोई बर्चस्व है ही नहीं। वहां आप ठीक से ईमानदारी से जनहित में काम करते हुए वोट मांगे तो शायद जनता आपको एक मौका दे भी देती लेकिन लालचवश जिस प्रकार कोंग्रेसियों ने पीढ़ी दर पीढ़ी कुछ न कुछ अलोकतांत्रिक या जनविरोधी काम करते हुए अपना जनाधार खुद खोया है उसे बरक़रार रखते हुए एमपी में कांग्रेस अपने लिए एक और गढ्ढा खोदने में जुट गयी है। janiye congres ki kamjori ka raaz

कांग्रेस लालच के कारण डर रही है

एक बार फिर से मैं आपको पुराने दिनों की गलतियों का परिणाम बता दूँ कि जिस किसी राज्य में कांग्रेस और बीजेपी के आलावा कोई तीसरा दल पनपा है वहां कांग्रेस का दुबारा सत्ता में आना असंभव सा हो गया।

जैसे आपके सामने कई उदहारण है बंगाल, बिहार, यूपी, ओडिसा, तमिलनाडु, आदि लेकिन जिस राज्य में कांग्रेस और बीजेपी दो ही प्रमुख पार्टी है वहां कांग्रेस 5 या दश साल बाद सत्ता में आ जाती है जैसे राजस्थान, हिमाचल, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, आदि तो ऐसी क्या मज़बूरी है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान जहां आज वाकई में जनता सरकार से नाराज दिख रही है। फिर भी कांग्रेस में आत्म विस्वास की कमी है इसका एक ही कारण है मेरे गुरु जी ने कहा था बेटा लालच और झूठ मानव को डरपोक यानि की कमजोर बना देता है अब फैसला आप जनता ने करना है कि कांग्रेस लालच के कारण डर रही है या झूठ के कारण ? janiye congres ki kamjori ka raaz

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( ये लेखक के निजी विचार है )

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