जो बाप का नहीं वो आपका ( जनता ) क्या होगा !



ये  कहावत  या  जुमला  अधिकांशतः  प्रयोग  किया  जाता  है लेकिन  लोग  इसे  केवल कहावत  या  जुमला  ही  मान  लेते  है, अमल करना भूल जाते है।  तभी  तो  आज  तक  के  इतिहास  में  ये  कई  बार  हो  चूका  है की  कई  सम्राज्य  का  विनाश हुआ  है। आधुनिक  समय  में  ये  जुमला  राजनीती  में  खूब  चलता  है पहले  राजनीति  में  राजनेता  उतरते  थे  किन्तु  समय  के साथ  सब  कुछ  बदल  गया। jo baap ka nahi wo janta ka kya hoga

अब  राजनीति राजनेताओं  के  बेटे  के  लिए  रोजगार  का  साधन  बन  गया  है।  खासकर, लोकतान्त्रिक  सम्राज्य  में  ये  और  भी   प्रचलन  में  आ  गया है।   भारत  कश्मीर से  कन्याकुमारी, पोरबंदर  से  सिलचर  तक  फैला  हुआ  है लेकिन  वर्तमान  समय  में  ऐसा  किसी  प्रदेश  में  नहीं  है की  राजनेता  का  बेटा  राजनीति में  न  हो। jo baap ka nahi wo janta ka kya hoga

कहने  का  तात्पर्य  है की  अब  राजनीती  योग्यता  पर  निर्भर  नहीं  रह  गई है बल्कि  वंशवाद  हो  गया  है जिसके  कई  उधारण  आपके  समक्ष  है। जिसमें  देश  का  सबसे  बड़ा  राज्य  उत्तर  प्रदेश  अव्वल  है यंहा  की  स्थिति  गुंडागिरी  और  वंशवाद  पर  टिकी है। jo baap ka nahi wo janta ka kya hoga

बाप, बेटे का ये झगड़ा पूर्व से निर्धारित था jo baap ka nahi wo janta ka kya hoga

वर्तमान  परिपेक्ष्य  में  देखा  जाये तो ये जुमला मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव पर पूरी तरह से लागु होता है। उत्तर  प्रदेश  में  इस  वर्ष  विधान  सभा  चुनाव  होने  है लेकिन  गद्दी  के  लिए  राजनेता  इस  कदर  खुद को  अर्श  से  फर्श  पर  गिरा लिये है वो अखिलेश यादव से कोई सीखें। पिछले साल में अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश में ऐसा कोई काम नहीं किये है कि लोग उन्हें याद करें, अथवा वोट दें । jo baap ka nahi wo janta ka kya hoga

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परन्तु अखिलेश यादव जिस-जिस कारण से चर्चा में है वो प्रदेश के लिए बिलकुल ही लाभकारी नहीं है। अखिलेश यादव ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुये राजनीति का वो “र” शब्द का ज्ञान हासिल कर लिया है जो प्रदेश की जनता के लिए वायरस समान है। यदि उत्तर प्रदेश की जनता इस वायरस से खुद को बचा नहीं पायी तो आने वाले दिनों में इनकी हालात और दयनीय हो जाएगी। jo baap ka nahi wo janta ka kya hoga

यदि अखिलेश की उपलब्धियों को गिनाये तो इसमें देश की एकता को भंग करने, राज्य में गुंडा गर्दी को बढ़ावा देने, विकास की जगह गुमराह करने में अधिक, राज्य में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में अव्वल रहे। जिससे प्रदेश की जनता त्रस्त है लेकिन अखिलेश यादव फिर भी अपनी गन्दी राजनीति से बाज नहीं आ रहे है। राज्य में विधान सभा चुनाव सर पर है और जो एग्जिट पोल आया है उसमें बीजेपी शीर्ष पर है। ऐसे में अखिलेश की बोलती बन्द हो गयी हैjo baap ka nahi wo janta ka kya hoga,

बाप, बेटे का ये झगड़ा पूर्व से निर्धारित था jo baap ka nahi wo janta ka kya hoga

इस कारण अखिलेश यादव बगावत पर उतर आये है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने जो 304 सीटो का लिस्ट जारी किया उससे अखिलेश प्रसन्न नहीं दिखे ,अखिलेश ने पार्टी में चाचा की उपस्थिति का बहाना बनाकर अपने पिता से ही बगावत कर ली। जिससे पार्टी में खलबली मच गई। आनन-फानन में सपा सुप्रीमो ने अखिलेश यादव को पार्टी से निष्काषित कर दिया लेकिन अगले दिन ही पार्टी में ले लिया और अपने भाई शिवपाल यादव को पार्टी से निष्कासित कर दिया। अब यादव परिवार का झगड़ा कोर्ट और कमीशन तक पहुँच गया है। jo baap ka nahi wo janta ka kya hoga

 

हालांकि, विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि बाप, बेटे का ये झगड़ा पूर्व से निर्धारित था और शिवपाल को पार्टी से निकालना भी पार्टी की सोची समझी चाल है।कुछ जानकारों का कहना है कि पीएम मोदी के उत्तर प्रदेश में बढ़ते वर्चस्व को कम करने के लिए सपा ने ये प्लानिंग की है ताकि पार्टी तीन भागों में विभक्त हो जाये और लोगों की सहानुभूति की कृपा से उत्तर प्रदेश में फिर से सरकार बना सके। लेकिन सवाल ये है कि जो बेटा अपने बाप का नहीं है वो जनता का क्या होगा ? ये तो अब उत्तर प्रदेश की जनता पर निर्भर है कि आने वाले विधान सभा चुनाव में वो किसे अपना वोट देते है। jo baap ka nahi wo janta ka kya hoga

( प्रवीण कुमार )