मोदी सरकार ने किया ऐलान जम्मू कश्मीर में लग सकता है इमरजेंसी !




हिजबुल मुजाहदीन के कमांडर बुरहान वाणी की मौत के बाद से घाटी में हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे है। घाटी में बढ़ती हिंसा से मोदी सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है या यूं कहे की पीएम मोदी की छवि भी धूमिल हुई है। पीएम मोदी की चिंता इस कदर बढ़ गयी है कि मोदी सरकार ने कल आनन-फानन में कैबिनेट बैठक के बाद भाजपा कोर ग्रुप की आपात बैठक बुलाई। यह बैठक तक़रीबन तीन घंटे तक चली। जिसमें मोदी सरकार के अहम मंत्रियों के अतिरिक्त जम्मू से पार्टी के नेता और केंद्र में मंत्री जितेंद्र सिंह भी शामिल रहे।पीएम मोदी ने कश्मीर मुद्दे पर मंत्री जीतेन्द्र सिंह से जानकारी ली। kashmir will face president rule 

विदित हो कि पिछले सप्ताह कश्मीर के दौरे पर गए सेना प्रमुख का रिपोर्ट और महबूबा मुफ़्ती से बातचीत और ख़ुफ़िया विभाग की रिपोर्ट से पीएम मोदी को अवगत कराया गया। सूत्रों की माने तो सेना जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ़्ती के रवैये से नाराज है। वही भाजपा कोर इकाई भी पिछले उपचुनाव से महबूबा मुफ़्ती के स्टैंड से खफा है। ऐसे में मोदी सरकार के पास दो विकल्प है। घाटी में शांति स्थापित करने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जाये या फिर आपातकाल की स्थिति पैदा कर उपद्रवियों को सबक सिखाया जाए। kashmir will face president rule 

मुफ़्ती 23 अप्रैल को दिल्ली आ रही है

गौरतलब है कि पिछले दिनों सुब्रमण्यन स्वामी ने एक बयान में कहा था कि कश्मीर को खाली कराकर उन्हें तमिलनाडु के शरणार्थी कैंप में रखा जाये और फिर पथरबाजों से सेना निपटे। इससे एक नए कश्मीर की स्थापना करने में मदद मिलेगी। वही मोदी सरकार स्वामी के इस बयान से इतने प्रभावित नहीं है। विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि भाजपा पीडीपी से नाता तोडना चाहती है और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के पक्ष में है। मोदी सरकार के लिए घाटी का मुद्दा मुफ़्ती के कारण पेचीदा होता जा रहा है। kashmir will face president rule 

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बता दें कि मुफ़्ती दो तरह की राजनीति कश्मीर में करना चाह रही है। पहला, सरकार में बने रहने के लिए बीजेपी का दामन थामे रहना। दूसरा, कश्मीरियों के स्नेह के लिए पथरबाजों पर सेना पर लगाम लगाना। इस तरह की दोहरी राजनीति से बीजेपी को कश्मीर में नुकसान होता दिख रहा है। वही पिछले उपचुनाव में मुफ़्ती ने अपने भाई को विजयी बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। वो उपचुनाव में अपने भाई को जिताकर केंद्र की राजनीति में पहुंचाने की कोशिश में थी। मुफ़्ती ये भी चाहती थी कि उनका भाई एनडीए का हिस्सा बने ताकि जब मंत्रिमंडल का विस्तार हो तो उन्हें कैबिनेट में जगह दिला सके लेकिन मुफ़्ती के अरमानो पर उस वक्त पानी फिर गया। जब उनका भाई उपचुनाव में हार गया। kashmir will face president rule 

अब मुफ़्ती फिर से मोदी से मदद की उम्मीद में है। फ़िलहाल मुफ़्ती 23 अप्रैल को दिल्ली आ रही है। उससे साफ़ जाहिर हो जाएगा कि मुफ़्ती किस दिशा में घाटी को ले जाना चाह रही है। यदि ये बातचीत सफल नहीं रही तो मोदी सरकार बड़ा फैसला ले सकती है। kashmir will face president rule  
( प्रवीण कुमार )