आरएसएस और हेडगेवार जानिए क्या है विवाद क्या है सच्चाई !




हाल ही में देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आरएसएस द्वारा आयोजित ‘संघ शिक्षा वर्ग-तृतीय’ में चीफ गेस्ट के रूप में शामिल हुए । इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति आरएसएस के प्रथम सरसंघचालक की जन्मस्थली पर पहुंचे। जहाँ उन्होंने विजिटर बुक में लिखा ‘आज मैं यहां भारत माता के एक महान सपूत के प्रति अपना सम्मान जाहिर करने और श्रद्धांजलि देने आया हूं’ .हालंकि पूर्व राष्ट्रपति के आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने पर काफी विवाद हुआ और सबसे अधिक तकलीफ कांगेस को हुई। know Hedgewar life story biography

कांग्रेस के काफी प्रयास के बाबजूद भी प्रणब मुखर्जी आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल हुए। वैसे आरएसएस के बारे में लोगों की विचारधारा में भिन्नता है कुछ आरएसएस को राष्ट्रप्रेमी तो कुछ उसे राष्ट्र विरोधी कहते है। इसी सन्दर्भ में आज मैं आपको आरएसएस के प्रथम सरसंघचालक की जीवनी के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसको जान लेने के बाद आप स्वंय समझ जायेंगे कि आरएसएस को राष्ट्र विरोधी कहने वाले कितने गलत है।

जी हां, डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार का जन्म नागपुर के एक गरीब ब्राह्मण परिवार में 1 अप्रैल 1889 को हुआ था | हेडगेवार बाल्यवस्था से क्रांतिकारी विचारधारा के थे उन्हें अपनी आजादी सबसे प्यारी थी और इसके लिए वे अपनी जुबान को हमेशा बुलंद रखते थे जब कभी आजादी की बात होती तो हेडगेवार झट से वन्दे मातरम बोलने से नहीं कतराते थे.

एक बार जब उनके स्कूल में अंग्रेज इंस्पेक्टर निरिक्षण के लिए आया तो हेडगेवार ने अपने कुछ साथियों के साथ “वन्दे मातरम” के नारे लगाकर अंग्रेज इंस्पेक्टर का स्वागत किया. उनके इस कार्य से इंस्पेक्टर गुस्से में आ गये और हेडगेवार को स्कूल से निकाल दिया .उसके बाद उन्होंने अपनी पढाई पूना के राष्ट्रिय स्कूल से की . know Hedgewar life story biography

उनकी बचपन का एक और वाकया है जब 22 जून, 1987 को महारानी विक्टोरिया के राज्यारोहण के 60वें साल के समारोह में उन्होंने मिठाई लेने से इंकार कर दिया .इस पर उनके बड़े भाई ने उनसे पूछा क्या तुम्हें मिठाई नहीं दी गई तो उन्होंने जबाब दिया कि अंग्रेजों ने ही भोंसले वंश को बर्बाद किया है और हम अंग्रेजों के समारोह में मिठाई कैसे खा सकते है .

1925 में विजयदशमी के दिन संघ की स्थापना की

इसके बाद उन्होंने अपनी प्रारम्भिक और माध्यमिक पढाई पूरी कि और जून 1914 में उन्होंने एलएम एंड एस परीक्षा पास कर ली। उसके बाद उन्होंने एक साल की अप्रेंटिसशिप पूरी की और 1915 में डॉक्टर बनकर नागपुर लौटे लेकिन क्रांतिकारी विचार धारा के हेडगेवार का अपने प्रोफेशन में जरा भी मन नहीं लगा और फिर क्या उन्होंने मरीजों के इलाज करने के बजाय बीमारी का पता लगाने में लग गये जिससे पूरा राष्ट्र ग्रसित था. know Hedgewar life story biography

जून 1940 को हेडगेवार का निधन हो गया

इसके बाद हेडगेवार अपनी जन्मभूमि नागपुर पहुंचे जहाँ वह भावजी कारवे से मिले जो नागपुर के क्रांतिकारी युवाओं को संगठित करने में जुटे थे। डॉ.हेडगेवार ने पंजाब और कलकत्ता के क्रांतिकारी संगठनों से करीबी संबंध रखा। हालंकि, वह 1910 में डॉक्टरी की पढ़ाई के समय ही नामी क्रांतिकारी संस्था अनुशीलन समिति से जुड़े थे और फिर 1915 में कांग्रेस में सक्रिय हो गए।

फिर दिन व् दिन उनकी राजनीति में सक्रियता बढती गई और 26 दिसंबर, 1920 को कांग्रेस के अधिवेशन में उन्हें उस समय गहरा झटका लगा जब अधिवेशन में गौ रक्षा को लेकर एक प्रस्ताव पेश किया गया था जिसका गांधीजी ने विरोध कर दिया था .इसके बाद इस विषय को लेकर कांग्रेस नेताओं में मतभेद हो गया और मीटिंग को बीच में ही खत्म कर दिया गया।

गाँधी जी के विरोध का डॉ.हेडगेवार के दिमाग पर काफी गहरा असर पड़ा . हालाँकि फिर भी उनके मन में गाँधी जी के प्रति सम्मान था और इसी कारण उन्होंने 1921 के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया जिसके लिए उन्हें जेल जाना पड़ा और 12 जुलाई, 1922 को उनको जेल से रिहा किया गया लेकिन तब तक वह काफी लोकप्रिय हो चुके थे और उनकी रिहाई पर स्वागत के लिए आयोजित सभा को मोतीलाल नेहरु और हकीम अजमल खा जैसे दिग्गजों ने संबोधित किया | know Hedgewar life story biography

वैसे तो वह उस वक्त तक कांग्रेस से जुड़े थे लेकिन उन्हें अहसास हो चूका था कि कांग्रेस के तुष्टिकरण नीतियों के कारण देश को अधिक नुक्सान होगा .ऐसे में उन्होंने 1925 में विजयदशमी के दिन संघ की स्थापना की और देश को एकत्र करने की कोशिश की .हालाँकि, संघ की स्थापना के बाबजूद कांग्रेस के प्रति उनका विचार सकारात्मक रहा. know Hedgewar life story biography

इसीलिए जब गाँधी जी ने 1930 नमक कानून विरोधी आन्दोलन छेड़ा तो संघ ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और जिस कारण हेडगेवार को नौ महीने कि सजा हुई .इस दौरान संघ का कार्य भार डा.परापंजे ने संभाला. जब 26 जनवरी 1930 को देश भर में तिरंगा फहराने का आह्वान किया गया तो हेडगेवार के निर्देश पर सभी संघ शाखाओं में 30 जनवरी को तिरंगा फहराकर पूर्ण स्वराज प्राप्ति का संकल्प किया गया | know Hedgewar life story biography

वहीँ दूसरी ओर उन्होंने क्रांतिकारीयो को भी समर्थन दिया .बात 1928 कि है जब कप्तान सांडर्स के जुर्म में भगतसिंह ,राजगुरु और सुखदेव फरार हुए तो राजगुरु फरारी के दौरान नागपुर में हेडगेवार के पास पहुचे थे जहाँ उन्होंने उमरेड में एक प्रमुख संघ अधिकारी भय्या जी ढाणी के निवास पर ठहरने की व्वयस्था की थी | भारतीय राजनीति और आजादी में हेडगेवार की भूमिका महत्वपूर्ण थी और उनके दिशा निर्देशानुसार अगर कांग्रेस भी चलती तो शायद आज देश की तस्वीर अलग होती. जून 1940 को हेडगेवार का निधन हो गया लेकिन उनका सघ कार्य आज भी गतिशील है . know Hedgewar life story biography

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