जितिया के दिन भूल से न करे ये काम, नहीं तो होगा बुरा अंजाम !




वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों अनुसार अश्विन माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को जितिया पर्व मनाया जाता है । तदानुसार, इस वर्ष 13 सितंबर 2017 को जितिया पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है। इस वर्ष 12 सितंबर को नहाय खाय, 13 सितंबर को निर्जला उपवास है। जबकि 14 सितम्बर को पारण है। जितिया व्रत हिंदी माह के अनुसार आश्विन महीना के कृष्णपक्ष अष्टमी को प्रदोष काल के दिन बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। know jitiya parv story

पितृ पक्ष की कथा एवं इतिहास

यह महिलाओं का त्यौहार है विवाहित महिलाओं पुत्र रत्न की पराप्ती के लिए यह त्यौहार मानती है। एवं माताये अपने पुत्र की सलामती के लिए जिताया का व्रत करती है। इस त्यौहार के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जो माताये इस तोहार को श्रद्धा पूर्वक मानती है भगवान् जीऊतवाहन उनके पुत्र पर आने वाली है सभी समस्याओं से उसकी रक्षा करतें हैं। आइये आज हम आपको जितिया व्रत की कथा के बारे मैं विस्तार पूर्वक बतातें हैं। know jitiya parv story

19 फरवरी 2018 को है विनायक चतुर्थी,जानिए कथा एवं इतिहास

समुद्र तट के निकट नर्मदा नदी के पास कंचनबटी नामक नगर था।  जहाँ का राजा मलयकेतु राज करता था।  नर्मदा नदी के पश्चिम दिशा मैं मरुभूमि था जिसे बालुहटा के नाम से जाना जाता था उस जगह पर एक विशाल पाकड़ का पेड़ था। उस पेड़ पर एक चील रहा करती थी। पेड़ के निचे खोधर था उसमें एक सियारिन ने अपना बसेरा बना रखा था । चील व  सियारिन दोनों  में बड़ी घनिष्ठ मित्रता थी। know jitiya parv story

जितिया पर्व की कथा

एक बार की बात है दोनों ने सामान्य महिला के जैसे जितिया व्रत करने का संकल्प लिया और माता शालीनबहन के पुत्र  भगवान् जीऊतवाहन की पूजा करने के लिए निर्जला व्रत रखा । भगवान् की लीला कुछ ऐसी हुई की उसी दिन उस नगर के एक बहुत बड़े व्यापारी का मृत्यु हो गयी। जिसका दाह संस्कार उसी मरुस्थल पर किया गया।  वह काली रात बहुत विकराल थी। घनघोर घटा बरस रही थी । बिजली करक रही थी बादल गरज रहे थे। जोरों की आंधी तूफ़ान चल रही थी। सियारिन को बहुत जोर की भूख लगी थी  मुर्दा देखकर वह अपने आपको रोक न सकी और उसका व्रत  टूट गया ।  परन्तु चील ने नियम एवं श्रद्धा के साथ दूसरे दिन अन्य महिलाओं की तरह व्रत का पारण किया । अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें www.hindumythology.org