क्या होता है पीई रेशियो




शेयर बाजार में निवेश के लिए इससे संबंधित जानकारियां होनी चाहिए। प्राइस टू अर्निंग्स रेशियो किसी कंपनी का परफार्मेंस मापने के काम आने वाला बहुत सिंपल टूल है। अमूमन जिस कंपनी के शेयर का पीई ज्यादा होता है वह ओवर वैल्यूड और जिसका पीई कम होता है, वह अंडरवैल्यूड माना जाता है। लेकिन किसी कंपनी का पीई देखकर यह यह नतीजा निकालना गलत साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पीई रेशियो में कंपनी के ग्रोथ रेट को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया जाता है। know pa ration 

कंपनियां अपनी लाइफ साइकल में अलग-अलग रफ्तार से बढ़ती हैं। अगर कोई निवेशक केवल कंपनी के पीई रेशियो का आकलन कर, निवेश करता है तो उसे कई तरह की सहूलियतें हैं। इस हिसाब से निवेश करने पर धीरे-धीरे आगे बढऩे वाली कंपनियां आकर्षक नजर आती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनका शेयर सेक्टर की अन्य कंपनियों के शेयर के मुकाबले कम पीई पर ट्रेड करता है। वहीं दूसरी ओर तीव्र विकास करने वाली कंपनियां महंगी नजर आती हैं क्योंकि उनके शेयर उंचे पीई पर ट्रेड करता है। know pa ration 

वैल्यूएशन एसेट वैल्यू पर होता है

जिस कंपनी में तेजी से तरक्की करने की क्षमता होती है उनमें निवेशकों की रुचि होती है। इससे उसके शेयर होल्डर्स का वेल्थ क्रिएशन अधिक होता है। साधारण शब्दों में कहें तो ज्यादा पीई रेशियो वाले शेयर बेहतर होते हैं लेकिन कंपनी में लगातार वृद्धि जारी होनी चाहिए। पीई रेशियो में ऐसी अनियमितता को दूर करने के लिए स्टॉक गुरु पीटर लिंच ने प्राइस टू अर्निंग्स ग्रोथ रेशियो का कॉन्सेप्ट विकसित किया है। इसमें शेयर के पीई की तुलना अर्निंग पर शेयर ग्रोथ रेट से की जाती है। know pa ration 

लिंच के मुताबिक, जिस शेयर की अर्निंग जितनी ज्यादा तेजी से बढ़ती है, उस शेयर के लिए उतने ही ऊंचे पीई को एक्सेप्ट किया जा सकता है। किसी भी कंपनी का प्राइस टू अर्निंग ग्रोथ रेशियो उसके पीई में प्रॉजेक्टेड ईपीएस ग्रोथ से भाग देकर कैलकुलेट किया जाता है। know pa ration 

हालांकि ज्यादातर एनालिस्ट्स पीईजी रेशियो जानने के लिए फोरकास्टेड अर्निंग यूज करते हैं लेकिन लिंच इसमें कंजर्वेटिव अप्रोच लगाते हैं। उनके अनुसार प्रोजेक्शन गलत भी हो सकता है। इसलिए लिंच ने कंपनी के लॉन्ग टर्म ईपीएस ग्रोथ ट्रेंड का पता लगाने वाला रेशियो का फाम्र्यूला बनाते समय पिछले दो साल के अर्निंग्स डेटा यूज किया। उनका मानना है कि कंपनी की फ्यूचर ईपीएस ग्रोथ कम से कम उसके हिस्टोरिकल एवरेज ग्रोथ के बराबर होती है। know pa ration 

जागरूक होने की आवश्यकता

एक से कम पीईजी रेशियो वाले स्टॉक ईपीएस ग्रोथ के हिसाब से अंडरवैल्यूड और एक से ज्यादा ओवरवैल्यूड माने जाते हैं। ऐसा इसलिए कि ऐसे स्टॉक के शेयरों में इतने ऊंचे रेट पर ट्रेड होता है कि वह ईपीएस ग्रोथ को सपोर्ट नहीं कर सकता। जिस शेयर का पीईजी रेशियो एक है उसके बारे में माना जाता है कि उसमें सही लेवल पर ट्रेड हो रहा है। लिंच के मुताबिक 0.5 से कम पीईजी रेशियो वाले शेयर अच्छे होते हैं। इस रेशियो की अपनी सीमाएं हैं। know pa ration 

इसे लॉस वाली कंपनियों पर लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि उनका पीई नहीं निकाला जा सकता। अगर पीईजी रेशियो प्रॉजेक्टेड अर्निंग के हिसाब से निकाला जाता है तो ऐसे प्रोजेक्शन की वास्तविकता उसके प्रभावी होने में अहम रोल अदा करती है। अगर प्रोजेक्शन या अनुमान सही नहीं साबित होता है तो पीईजी रेशियो गलत हो जाएगा। यह रेशियो रियल एस्टेट और एयरलाइंस स्टॉक्स पर लागू नहीं होता क्योंकि उनका वैल्यूएशन एसेट वैल्यू पर होता है। know pa ration