कोरम पर कोहराम




संसद चल रहा है तो सांसद भी दिल्ली में ही हैं। लेकिन संसद की कार्यवाही के लिए कोरम पूरा नहीं होता है। जिससे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। संसद चलाने के लिए कोरम का पूरा होना आवश्यक होता है। ताकि कोई बिल पेश हो जिसपर चर्चा हो और वह कानून बने। koram par kohraam 

पिछले दिनों संसद में सत्ताधारी दल के कई सांसद मौजूद नहीं थे जिसको लेकर निर्देश जारी किए गए। उसके बाद सांसद भी हरकत में आ गए। अभी कई सांसद अब अपने इलाके में भी जाते हैं चाहे संसद चल रहा हो या नहीं लेकिन जानकारी अपने संगठन में देकर जा रहे हैं। जिससे कई तरह की सुविधाएं भी हो रही है। koram par kohraam 

संसद की पुराने दिन लौट कर आ गए हैं

खैर, कोरम की बात चली है तो बता दें की इंदिरा गांधी के कार्यकाल में जब संसद की घंटी बजती थी तो खुद वे तेजी से संसद की ओर जाती थी। और साथ में सांसद भी जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर अब फिर से इस गरिमा को कायम किया गया है और संसद भी इस गरीमा को समझ चुके हैं। जिसके बाद अब कोरम भी पूरा हो रहा है और संसद की कार्यवाही में भाग भी ले रहे हैं पिछले दिनों जिस प्रकार से सांसद व फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने वित्त संबंधी बिल पर जिस प्रकार से अपने मत को रखा जिससे प्रधानमंत्री से लेकर वित्त मंत्री भी अंचभित रहे गए। koram par kohraam 

शादी वाले घोड़े, युद्ध के मैदान में नहीं चलते

यहीं नहीं कई और सांसदों ने अपने होम वर्क काफी अच्छे से किया जो साफ तौर पर दिख रहा था। प्रधानमंत्री के निर्देश पर अगर सांसद इस तरह से तैयार होकर आ रहे हैं तो तय है कि संसद की पुराने दिन लौट कर आ गए हैं जो पिछले दो तीन दशकों से देखने को नहीं मिल रहा था। और अब कोरम पर कोहराम भी नहीं हो रहा है। यह सब नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी के कारण हो रहा है।  koram par kohraam