‘भारत के बेटे’ कुलभूषण जाधव पर अंतराष्ट्रीय अदालत ने दिया फैसला नहीं मिलेगी फांसी




 इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने कुलभूषण जाधव मामले में अपना फैसला सुनाना शुरू कर दिया है। इस मामले में तीन दिन पहले भारत और पाकिस्तान, दोनों पक्ष की दलीलें सुनी थीं। कोर्ट के जज ने फैसला सुनाते हुए माना कि विएना संधि के अनुसार जाधव को काउंसलर एक्सेस मिलना चाहिए था। kulbhushan jadhav will come india 

कोर्ट के जज ने कहा दोनों ही देश इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके हैं ऐसे में जाधव की काउंसलर एक्सेस की मांग मानी जानी चाहिए थी। हालांकि, कोर्ट ने अभी यह तय ही नहीं किया है कि वह आतंकवादी थे या नहीं। kulbhushan jadhav will come india 

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गौरतलब है सुनवाई के दौरान भारत ने कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की ओर से दी गई फांसी की सजा खत्म करने की मांग की थी। भारत ने आशंका व्यक्त की थी कि कुलभूषण जाधव को सुनवाई खत्म होने से पहले ही फांसी दी जा सकती है। भारतीय नौसेना के पूर्व नेवी अफसर 46 वर्षीय जाधव को पाकिस्तान ने 3 मार्च को गिरफ्तार किया था।

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय

रिटायर्ड नेवी अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान के मिलिट्री कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने पर भारत ने इसे अंतराष्ट्रीय न्यायालय में ले गया जिसे आज फैसला आया है जिसमें क्या सजा मुकरर रहेगी या बरी करने को कहा जाएगा इसपर सबकी निगाहें टिकी हैं। अतंरराष्ट्रीय न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलील सुन ली है।

भारत ने साफ तौर न्यायालय को कहा है कि बिना सबूत के ही पाकिस्तान मिलिट्री कोर्ट ने सजा सुना दी है जिसपर तत्काल रूप से रोक लगा दी जानी चाहिए। कुलभूषण जाधव को 3 मार्च को पाकिस्तान ने गिरफ्तार किया गया था। भारत ने 08 मई को विएना के अंतरराष्टीय अदालत में विएना समझौते के उल्लंघन का आरोप जड़ा था जिसपर सुनवाई हुई।

भारत ने दलील दी है कि पाकिस्तान के पास कोई सबूत नहीं हैं फिर भी बिना सबूत के ही जाधव को फांसी की सजा सुना दी। जिसको लेकर भारत ने लगातार कूटनीति स्तर पर पाकिस्तान को घेरा। जिसमें मजबूत मुस्लिम राष्ट्रों से सहयोग भी लिया। भारत ने कुलभूषण जाधव को सजा के विरुद्ध पाकिस्तान सरकार से कई बार गुहार लगाई।

भारत और पाकिस्तान

यहां तक कि पाकिस्तान राजनयिक को बुलाकर भी अपना विरोध जताया लेकिन पाकिस्तान की ओर से कभी भी उत्साहजनक बातचीत नहीं हुई। जिसके बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की ओर रूख किया जिसमें अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पहले इस सजा पर तत्कालीन रूप से रोक लगा दी थी।

जिसे भारत की पहली जीत कही जा सकती थी। अब जब आज सुनवाई पूरी हुई और फैसला आने वाला है तो सबकी निगाहें न्यायालय पर टिकी है। गौरतलब है कि इसके पहले 18 साल पहले भारत और पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में आमने सामने हुए थे kulbhushan jadhav will come india