लालू यादव के बड़े बेटे ने धर्म बदला




इष्ट देव की पूजा करना अच्छा है जिससे कई तरह की अनुशासन भी मन में जागता है। लेकिन सुविधानुसार बदलाव कई सवाल खड़े करता है।बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और दिग्गज राजनेता लालू यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव आए दिन चर्चा में आ ही जाते हैं। तेज प्रताप अपनी कृष्ण भक्ति के लिए जाने जाते हैं। उनकी गौशालों में बांसुरी बजाते कई तस्वीर भी सामने आई हैं और कहा जाता था कि वे सदा कृष्ण भक्ति में ही रमे होते हैं। लेकिन संगति ने उन्हें कुछ और बना दिया है। lalu yadav son changed religion 

लालू यादव से सीख तो लेनी ही चाहिए।

धर्म अपने सुविधानुसार बना लेते हैं। अब तेज प्रताप पर भी संगति का प्रभाव पड़ गया है और वे अपनी संगति को अमलीजामा पहनाने के लिए अपने इष्ट देव ही बदल दिए। यानी कृष्णभक्ति से महादेव भक्ति। दरअसल कृष्ण भक्ति में मांसाहारी भोजन को दूर रखा गया है। लेकिन ऐसा नहीं है कि देवों के देव महादेव में मांसाहारी की इजाजत देते हैं। लेकिन अपनी सुविधानुसार लोग इनको लचिला देव मानते हैं। महादेव दरअसल गरीबों के देव हैं जिसकी पूजा छोटे जाति के लोग ज्यादा करते हैं। जहां खाने में कोई परहेज नहीं किया जाता है कह सकते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति ही वैसी होती है। जिसका फायदा तेजप्रताप यादव उठा रहे हैं। lalu yadav son changed religion 

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अब जीभ के आगे भला किसका चला है। अब इन्हें मांसाहारी भोजन रास आने लगा है जिसके लिए इन्होंने तरीका ही निकाल लिया। कहा जाता है कि पहले लालू यादव भी अपने स्वाद के लिए कई तरह के मंत्री रखे थे कबाब मंत्री, मछली मंत्री। लेकिन समय ने उन्हें सिखाया और वे अब इनसब से बहुत दूर हैं। ऐसे में अगर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप समय रहते सीख नहीं ली तो तय है कि इष्ट देव तो बदले जा सकते हैं लेकिन सार्वजनिक जीवन में एक बार जो छवि बन गई तो इसे बदलना काफी कठिन हो जाता है। किसी के निजी खाने पर सवाल उठाना ठीक नहीं है लेकिन जब वही छवि आपके राजनीति जीवन से जुड़ा है तो काफी नुकसानदायक होता है। तेज प्रताप यादव को अपने पिता भारतीय राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी लालू यादव से सीख तो लेनी ही चाहिए। और संगति पर विचार करने की जरूरत है। lalu yadav son changed religion