लोकपाल बिल पास होते ही देश से मोदी लहर छू मंतर हो जाएगी : मायावती




देश में लोकपाल की नियुक्ति और लोकायुक्त कानून को लेकर राजनीति होती रही हैं। जिसको लेकर सरकार और विपक्ष टकराता रहा है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब इसपर फिर से राजनीति शुरू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अब लोकपाल और लोकायुक्त कानून सही है और व्यवहारिक है इसके लागू करने के लिए लटकाकर रखना ठीक नहीं है। lokpal bill act 2013

अण्णा हजारे ने आंदोलन किया था

इस कानून में जो प्रावधान किए गए हैं उसके मुताबिक लोकसभा के विपक्ष के नेता लोकपाल चयन पैनल में रहेंगे। लेकिन लोकसभा में अभी नेता प्रतिपक्ष नहीं है क्योंकि जिस तरह से संसद में कांग्रेस के मात्र 45 सदस्य ही चुनकर आए हैं जो 545 सदस्यों में दस फीसदी से कम है। गौरतलब है कि शांति भूषण की याचिका पर यह लोकायुक्त की नियुक्ति की याचिका 28 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। lokpal bill act 2013

जिसमें कहा गया था कि सरकार जानबूझकर लोकपाल की नियुक्त नहीं कर रही है। जैसा की सर्वविदित है संसद ने 2013 में ही लोकपाल विधेयक पारित कर दिया था और इसे एक वर्ष के अंदर यानी 2014 में लागू भी कर दिया गया था। लेकिन लोकपाल की नियुक्ति नहीं हुई। जिसको लेकर सवाल खड़े हो गए। न्यायालय ने भी इस कानून पर केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए थे। lokpal bill act 2013

जिसमें लोकपाल की नियुक्ति नहीं होने पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। न्यायालय ने कहा था कि वह इस कानून को मरने नहीं देंगे। अर्टानी जनरल मुकुल रोहतगी ने साफ कहा कि अभी के हिसाब से लोकपाल की नियुक्ति नहीं किया जा सकता क्योंकि नेता प्रतिपक्ष है ही नहीं। जिसके संशोधन संसद में लंबित पड़े हैं। lokpal bill act 2013

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लोकपाल की नियुक्ति को लेकर अण्णा हजारे ने आंदोलन किया था इस आंदोलन में प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल भी साथ थे। इस याचिका को एनजीओ कॉमन कॉज ने दायर किया था जिसमें केंद्र को लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून 2013 के तहत लोकपाल की नियुक्ति का निर्देश जारी किया जा सके। प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट से यह अनुरोध किया था कि लोकपाल की नियुक्ति सहित इसकी प्रक्रिया पूर्ण रूप से पारदर्शी होनी चाहिए जिससे की कानून अपने उद्देश्य में सफल हो। lokpal bill act 2013